नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। तंबाकू की महामारी को काबू करने की अंतरराष्ट्रीय संधि 'एफसीटीसी' में शामिल देशों की बैठक (कॉप-7) के दौरान मेजबान देश के नाते तो भारत को तरजीह मिल ही रही है, काम को भी जम कर तारीफ हो रही है। सोमवार को सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जब इस लिहाज से भारत के काम गिनाए तो दुनिया भर के प्रतिनिधियों ने तालियां बजा कर इसका स्वागत किया।

नड्डा ने जानलेवा तंबाकू उत्पादों के खिलाफ उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी देते हुए कहा, 'भारत में गुटखा और निकोटीन युक्त पान मसाला के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।' इसी तरह उन्होंने कहा, 'हमने इस साल अप्रैल के महीने से तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर 85 फीसदी हिस्से में सचित्र चेतावनी छापने का नियम लागू किया है। किशोर न्याय (जेजे) कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर सात साल की जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।' उन्होंने फिल्म और टीवी में तंबाकू उत्पादों को बढ़ावा देने के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत इस दिशा में सबसे पहले प्रयास करने वाले देशों में है।

तंबाकू विरोधी अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे टाटा कैंसर अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, 'इनमें से अधिकांश उपाय स्वास्थ्य क्षेत्र के बाहर के हैं। भारत अकेला ऐसा देश है जिसने चबाने वाले तंबाकू को प्रतिबंधित किया है। इसका एक बड़ा श्रेय सुप्रीम कोर्ट को जाता है, जिसने कई राज्यों की ओर से लगो गए प्रतिबंध को सही ठहराया। इसी तरह भारत दुनिया का अकेला देश है जिसने नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने को गैर जमानती अपराध बनाया है। इसका श्रेय महिला और बाल विकास मंत्रालय को जाता है।'

गिनाई उपलब्धियां

1. गुटखा पर देश भर में लगाया प्रतिबंध

2. बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर सात साल की जेल

3. उत्पादों पर 85 फीसदी हिस्से में सचित्र चेतावनी छापना अनिवार्य किया

4. फिल्मों में जागरुकता के वीडियो दिखाना अनिवार्य

चबाने वाले तंबाकू पर श्रीलंका भी चिंतित

श्रीलंका के राष्ट्रपति मित्रपाल श्रीसेन ने भी सम्मेलन के दौरान चबाने वाले तंबाकू उत्पादों पर सख्ती की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश बहुत गंभीरता से प्रभावित हैं। साथ ही यह सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवहार में शामिल होने की वजह से इससे जूझना ज्यादा जटिल है।

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