जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोयला घोटाले की आंच में घिरी केंद्र सरकार ने अंतत: यह तय कर दिया कि आने वाले दिनों में कोई भी कोल ब्लॉकों का आवंटन उस तरह से नहीं करे जिस तरह से संप्रग के कार्यकाल में किया गया था। अब कोयला ब्लॉकों का आवंटन खुली निविदा प्रक्रिया के तहत होगा। साथ ही जिन कंपनियों को ब्लॉक मिलेगा, उन्हें पांच वर्षो के भीतर इसमें से कोयला उत्पादन शुरू करना होगा।

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कोयला ब्लॉक आवंटन की नई नीति के प्रस्ताव को मंगलवार को हरी झंडी दिखा दी। अभी तक सरकार अपने विवेक के आधार पर कोयला ब्लॉक का आवंटन करती आई है। इसमें कई तरह की गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। संप्रग-एक के कार्यकाल में आवंटित कोयला ब्लॉकों में भ्रष्टाचार किए जाने के मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में 2004 से 2009 के बीच आवंटित कोयला ब्लॉकों से देश को 1.80 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया था। विपक्षी पार्टियों ने इसको लेकर प्रधानमंत्री पर भी आरोप जड़े हैं। अब पूरी नीति ही बदली जा रही है।

कोयला मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि नई नीति पूरी तरह से पारदर्शी होगी। ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनियों को पांच वर्षो के भीतर कोयला निकालना होगा। असल में कोयला ब्लॉकों के विकास की पूरी रूपरेखा पहले ही देनी होगी। मानदंडों पर खरा नहीं उतरने वाले ब्लॉकों का आवंटन सरकार कभी भी रद कर सकेगी। आवंटन से पहले ही वन एवं पर्यावरण मंत्रालय कोयला ब्लॉकों की जांच करेगा और निविदा से पहले ही इनके बारे में अपनी रिपोर्ट भी दे सकेगा। हालांकि इन्हें अंतिम मंजूरी पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही दी जाएगी।

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बताया, 'नई नीति पूरी तरह से पारदर्शी होगी। इससे न सिर्फ सरकार को फायदा होगा, बल्कि कंपनियों के लिए भी कीमत तय करना आसान होगा।' कोयला ब्लॉक की कीमत तय करने का नया तरीका निकाला गया है। इसके तहत कुछ राशि पहले देनी होगी और कुछ कोयला उत्पादन शुरू होने के बाद। यह रकम कोयला की गुणवत्ता वगैरह के आधार पर तय होगी। अगर बिजली कंपनियों को कोयला ब्लॉक दिया जाता है तो उन्हें कीमत तय करने में कुछ रियायत भी दी जाएगी ताकि वे सस्ती दरों पर बिजली पैदा कर सकें।

शेल गैस नीति को हरी झंडीइसके साथ ही सीसीईए ने बहुप्रतीक्षित शेल गैस नीति को भी मंजूरी दे दी। शुरुआत में सिर्फ सरकारी क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को ही शेल गैस निकालने की इजाजत दी गई है। अन्य कंपनियों को शेल गैस ब्लॉक देने के लिए अलग से कैबिनेट से मंजूरी ली जाएगी।

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