नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जीएसटी चोरी रोकने के इरादे से लाए गए 'ई-वे बिल' की शुरुआती विफलता से सबक लेते हुए सरकार सीजीएसटी कानून के विवादित प्रावधानों को कुछ और समय तक ठंडे बस्ते में डालकर रख सकती है। जीएसटी काउंसिल 10 मार्च को होने वाली बैठक में इस आशय के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है।

सूत्रों ने कहा कि 'ई-वे बिल' के क्रियान्वयन में जल्दबाजी की वजह से सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। यही वजह है कि अब विवादित प्रावधानों को अमल में लाने से पहले हर दृष्टिकोण से विचार किया जा रहा रहा है। सूत्रों ने कहा कि रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म, टीडीएस और टीसीएस से संबंधित प्रावधानों को अगले कुछ महीनों के लिए ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। हालांकि इस बारे में फैसला काउंसिल ही करेगी। काउंसिल चाहे तो इससे अधिक समय तक के लिए भी इस प्रावधान को आगे टाल सकती है।

दरअसल, सीजीएसटी कानून की धारा 51 और 52 में टीडीएस (टैक्स डिडेक्टेड एट सोर्स) और टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) के संबंध में प्रावधान है। टीसीएस संबंधी धारा के तहत ई-कॉमर्स ऑपरेटरों को जीएसटी काटकर सरकार के खाते में जमा कराने का प्रावधान है। ई-कॉमर्स से जुड़ी कंपनियां इस प्रावधान को लेकर आपत्ति जता चुकी हैं। यही वजह है कि देश में जीएसटी एक जुलाई 2017 से लागू होने के बाद भी सरकार ने अब तक टीडीएस और टीसीएस से संबंधित धाराओं का क्रियान्वयन नहीं है। इनसे संबंधित दोनों धाराओं को अब तक ठंडे बस्ते में ही डाला रहा है।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी कानूनों में संशोधन सुझाने के लिए गठित की गयी एक समिति ने इस आशय की सिफारिश भी की थी। जीएसटी काउंसिल की 18 जनवरी को हुई 25वीं बैठक में ये सिफारिशें चर्चा के लिए रखीं गई लेकिन इन पर निर्णय नहीं हो सका। उल्लेखनीय है कि सरकार ने सीजीएसटी कानून की धारा 9 (4) के तहत रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के प्रावधान को भी फिलहाल 31 मार्च 2018 तक ठंडे बस्ते में डाला हुआ है। इस प्रावधान को लेकर भी कारोबारियों ने चिंता प्रकट की थी।

Posted By: Tilak Raj

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