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'कचरे को ऊर्जा में बदलने का मौका है गोबरधन', हरदीप सिंह पुरी बोले- अन्नदाता से ऊर्जादाता बनेंगे किसान

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:45 PM (IST)

केंद्र सरकार ने गोबरधन योजना शुरू की है, जिसका लक्ष्य कचरे से ऊर्जा (कंप्रेस्ड बायोगैस) उत्पादन को बढ़ावा देना है। ...और पढ़ें

किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने का लक्ष्य (हरदीप पुरी- फाइल फोटो)

किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने का लक्ष्य (हरदीप पुरी- फाइल फोटो)

HighLights

  1. गोबरधन योजना कचरे को ऊर्जा में बदलने का अवसर प्रदान करती है।

  2. 23,731 करोड़ रुपये से सीबीजी उत्पादन 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य।

  3. ईंधन आयात घटाकर, 1.5 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गोबर, खेती के अवशेष और जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलने के लिए गोबरधन (गैल्वनाइजिंग आर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना शुरू की है। इस योजना के शुभारंभ के अवसर पर, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि गोबरधन कचरे को ऊर्जा में बदलने का अवसर है।

23,731 करोड़ की इस योजना का मकसद कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को 10 गुना बढ़ाना, ईंधन आयात पर खर्च होने वाले ₹40 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत करना और 1.5 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है।

पुरी ने कहा कि सरकार जैविक कचरे को देश के लिए ऊर्जा का नया स्रोत बनाना चाहती है। इसके तहत गोबर, फसलों के अवशेष, खाद्य कचरा और अलग किया गया जैविक कचरा इस्तेमाल कर सीबीजी और जैविक खाद बनाई जाएगी।

इस योजना के तहत न केवल पूंजीगत सहायता मिलेगी, बल्कि खेती के अवशेष, गोबर, खाद्य अपशिष्ट समेत जैविक कचरे से बनने वाले नवीकरणीय रिन्यूएबल ईंधन की गारंटीड खरीद की सुविधा भी मिलेगी। यह योजना किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने में मदद करेगी।फिलहाल भारत में 0.4 मिलियन मीट्रिक स्टैंडरड क्यूबिक मीटर प्रति दिन सीबीजी बनता है।

इसे बढ़ाकर 4-6 मिलियन मीट्रिक स्टैंडरड क्यूबिक मीटर प्रति दिन करने का लक्ष्य है। सरकार को उम्मीद है कि इससे 2030 तक ऊर्जा में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी मौजूदा 6-7 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत करने में मदद मिलेगी।

सीबीजी की आपूर्ति सिटी-गैस नेटवर्क के जरिये सीएनजी ट्रांसपोर्ट और घरेलू पीएनजी इस्तेमाल के लिए की जा सकती है।इस योजना से करीब एक करोड़ टन जीवाश्म ईंधन की जगह स्वच्छ गैस इस्तेमाल होने और चार करोड़ टन से ज्यादा कार्बन डाइआक्साइड₂ उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।

किसानों के लिए करीब 25 करोड़ टन जैविक खाद भी तैयार हो सकती है। इससे सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी में ₹75 हजार करोड़ से ज्यादा का योगदान का अनुमान है।हर सीबीजी परियोजना को अधिकतम ₹30 करोड़ की पूंजी सहायता मिल सकती है।

सरकार सीबीजी की शत प्रतिशत तक खरीद सुनिश्चित करेगी। कीमत करीब ₹98 प्रति किलो रखी गई है। यह व्यवस्था मार्च 2036 तक रहेगी। गैस कंपनियों के लिए सीबीजी खरीद की अनिवार्यता 2026-27 में तीन प्रतिशत और 2028-29 से पांच प्रतिशत होगी।

इस समय देश में वार्षिक लगभग 66 अरब घन मीटर गैस की जरूरत है, जिसमें से लगभग आधा आयात किया जाता है, जबकि 2030 तक मांग 95-100 अरब घन मीटर तक पहुंचने का अनुमान है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)