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गोवा में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदुत्व विरोधी नारेबाजी, 300 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

Published: Sun, 18 Oct 2026 12:36 PM (IST)

गोवा पुलिस ने पणजी में 11 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने और ...और पढ़ें

गोवा में CJP के विरोध प्रदर्शन में हिंदुत्व विरोधी नारेबाजी  (स्क्रीनग्रैब- सोशल मीडिया)

गोवा में CJP के विरोध प्रदर्शन में हिंदुत्व विरोधी नारेबाजी (स्क्रीनग्रैब- सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, पणजी। गोवा के पणजी में 11 अक्टूबर को आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने और विवादित नारेबाजी करने के आरोप में गोवा पुलिस ने 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा बिना अनुमति निकाले गए इस प्रदर्शन के एक वीडियो का संज्ञान लेते हुए स्थानीय निवासी की शिकायत पर की गई है।

पणजी पुलिस निरीक्षक विजयकुमार चोडंकर ने बताया कि पणजी में आयोजित एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान, मुख्य न्यायिक परिषद के पदाधिकारियों और समर्थकों ने 'मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, हिंदुत्व मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए, जिससे धार्मिक असामंजस्य को बढ़ावा मिला और जानबूझकर हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने धार्मिक असामंजस्य और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के प्रयास के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया है। इससे पहले मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा था कि घटना की जांच चल रही है और सरकार राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

11 अक्टूबर की है घटना

दरअसल, पणजी के तलेगाओ निवासी रामप्रसाद केलकर ने सोशल मीडिया पर वायरल 11 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर में में उन्होंने लिखा, 'मैंने वीडियो देखा है, सीजेपी के सदस्यों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें एसआईआर में अनियमितताओं और देश की मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए उनके इस्तीफे की मांग की गई थी।

हालांकि, यह देखा गया कि प्रदर्शनकारी हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे, जिससे पता चलता है कि यह विरोध प्रदर्शन समाज और इलाके में सद्भाव और शांति भंग करने के लिए आयोजित किया गया था।'

नहीं मिली थी प्रदर्शन की अनुमति

केलकर ने अपनी शिकायत में कहा, 'स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मुझे पता चला है कि सीजेपी की एक महिला समन्वयक ने उत्तरी गोवा के कलेक्टर से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। हालांकि आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन बताया था।'

जिला प्रशासन द्वारा आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने के बाद, जब प्रदर्शनकारियों ने वहां प्रवेश करने की कोशिश की, तो पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में, बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा 11 अक्टूबर की देर शाम बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई किए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।