जेनेटिकली मॉडिफाइड बासमती चावल की 'मंजूरी' पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट से अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार
सुप्रीम कोर्ट से जीएम बासमती चावल की कथित मंजूरी पर अवमानना याचिका की तत्काल सुनवाई की मांग की गई है।

जेनेटिकली मॉडिफाइड बासमती चावल की 'मंजूरी' पर विवाद।
HighLights
जीएम बासमती चावल की मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका।
2024 के फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।
पारंपरिक बासमती और कृषि पारिस्थितिकी को खतरा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की कृषि परंपरा, बासमती की विशिष्ट पहचान और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि वह जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों पर 2024 के अपने फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करे। यह मांग जीएम बासमती चावल की खेती की कथित मंजूरी को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच की गई है।
जीएम फसलों से जुड़ी अवमानना याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाकर्ता अरुणा रोड्रिग्स की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जीएम फसलों से जुड़ी अवमानना याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
सरकार ने हर्बिसाइड-टॉलरेंट जीएम बासमती चावल की खेती को हरी झंडी दी
प्रशांत भूषण ने कोर्ट को आगाह करते हुए कहा कि सरकार ने हर्बिसाइड-टॉलरेंट जीएम बासमती चावल की खेती को हरी झंडी दे दी है। उन्होंने गंभीर आशंका जताई कि यह फैसला हमारे पारंपरिक बासमती चावल के वजूद को तबाह कर देगा। इससे फसलों में अपरिवर्तनीय संक्रमण फैलेगा, जो पूरे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र में भारी तबाही मचा सकता है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2024 के उस फैसले के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार को आदेश दिया गया था कि राज्यों, विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ परामर्श के बाद ही जीएम फसलों पर एक व्यापक राष्ट्रीय नीति तैयार की जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नीति बनने से पहले ही 'रोबीनोवीड' ब्रांडेड बासमती (मई 2024) तथा 'कमला' (डीपीआर राइस 100) और 'पूसा डीएसटी राइज 1' (मई 2025) जैसी जीन-संपादित किस्मों को व्यावसायिक रूप से जारी कर दिया गया, जो कोर्ट को दिए गए आश्वासनों का सीधा अवमानना है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
