सेना को विकसित करनी चाहिए भविष्य के युद्धों से लड़ने की क्षमताएं : पूर्व सेना प्रमुख
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि भारतीय सेना को वर्तमान सुरक्षा खतरों से निपटने और भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज पांडे। (फाइल)
HighLights
सेना को भविष्य के युद्धों से लड़ने की क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।
बदलते युद्ध स्वरूप के लिए लंबी अवधि की तैयारी आवश्यक है।
साइबर, अंतरिक्ष युद्ध जैसे नए खतरों के लिए तैयार रहें।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज पांडे ने कहा है कि देश की सेनाओं को वर्तमान सुरक्षा खतरों से निपटने और भविष्य की चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए जो उन्हें भविष्य के युद्धों से प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम बना सकें।
यहां एक कार्यक्रम में जनरल पांडे ने कहा कि जहां राष्ट्रीय हित शामिल होते हैं, वहां सैन्य बल या सैन्य शक्ति की प्रधानता होती हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन के लंबे समय से चल रहे युद्ध और ईरान व अमेरिका-इजरायल युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और अब एक पूर्णकालिक व लंबी अवधि के युद्ध के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि अगर कोई राष्ट्र मजबूत, शक्तिशाली और सक्षम है, तो ही युद्ध नहीं होगा; लेकिन यदि आप कमजोर हैं, तो युद्ध छिड़ सकता है।
साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उभरते नए सुरक्षा खतरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब एक नया सिद्धांत होना चाहिए, ''अप्रत्याशित की अपेक्षा करें। भविष्य में क्या होगा? भू-राजनीतिक तौर पर आपके गठबंधन किसके साथ हैं, आपके दोस्त कौन हैं और आपके विरोधी कौन हैं- यह बताना अब मुश्किल हो गया है।''
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के बीच एक पारस्परिक संबंध होता है। जब हम 'विकसित भारत' की परिकल्पना करते हैं, तो हम क्या सोचते हैं- एक ऐसा देश जो एकजुट, सुरक्षित, स्थिर, समृद्ध और आत्मनिर्भर हो।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
