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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या भारत ने किराना हिल्स पर किया था हमला? पूर्व CDS ने किया खुलासा

Published: Tue, 25 Aug 2026 06:13 PM (IST)Updated: Tue, 25 Aug 2026 09:53 PM (IST)

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के रणनीतिक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने किराना ...और पढ़ें

पूर्व CDS अनिल चौहान ने किराना हिल्स हमले और रणनीति पर किया खुलासा

पूर्व CDS अनिल चौहान ने किराना हिल्स हमले और रणनीति पर किया खुलासा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम के दौरान पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदू' और उसके दूरगामी रणनीतिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कैराना हिल्स पर भारत के हमले को लेकर भी बातचीत की। साथ ही उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन भारत की अन्य सैन्य कार्रवाईयों से कितना अलग था।

ऑपरेशन सिंदूर का रणनीतिक प्रभाव

ऑपरेशन सिंदूर के मुख्य एक्टिव ऑपरेशन्स समाप्त होने के लगभग 15 महीने बाद पूर्व CDS ने इसके रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, इसे खत्म हुए लगभग एक साल और तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन कुछ मायनों में इसका असर आज भी जारी है।

भले ही मुख्य सैन्य कार्रवाई पूरी हो चुकी है, पर यह ऑपरेशन भारत और विदेश दोनों जगह रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच गहरी दिलचस्पी का विषय बना हुआ है।

क्या भारत ने कैराना हिल्स पर किया था हमला?

पूर्व सीडीएस ने कहा कि कभी-कभी यह सवाल उठता है कि क्या कैराना हिल्स पर हमला हुआ था या नहीं, जहां उनकी न्यूक्लियर फैसिलिटीज हैं, उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा में कई लोइटरिंग मिशन भेजे थे और किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है।

तो लोइटरिंग मिशन का काम सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद राडार को खोजना होता है, और इसकी एक तय समय-सीमा होती है; यानी यह लगभग 2 घंटे तक हवा में घूमता रहता है और अगर कोई टारगेट नहीं मिलता, तो यह नीचे आकर कहीं टकरा जाता है। हो सकता है कि यह उन्हीं पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया हो।

ऐसे में लोगों के मन में उठने वाले सवालों की यह एक वजह हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया ने भी कुछ ऐसी तस्वीरें दिखाई थीं जिनमें किराना हिल्स से धुआं निकलता दिख रहा था।

उन्होंने कहा, हमने अपने लिए जो एस्केलेशन मैट्रिक्स (तनाव बढ़ने की स्थिति से निपटने का तरीका) तैयार किया था, उसमें एक सिद्धांत यह भी था कि आखिरी वार या जीत का फैसला हमेशा हमारी तरफ से ही होगा, न कि पाकिस्तानियों की तरफ से।

ऑपरेशन सिंदूर दूसरी कार्रवाईयों से अलग

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर' पिछली सैन्य कार्रवाइयों से इस मामले में अलग था कि इसमें रणनीति को लेकर कोई भी अनिश्चितता या हिचकिचाहट नहीं दिखाई गई। जहां उरी हमले के बाद भारत ने जमीनी रास्ते से सर्जिकल स्ट्राइक की थी और पुलवामा के बाद भारी सैन्य बल के साथ हवाई हमले का रुख अपनाया था।

वहीं 'ऑपरेशन सिंदूर' में एक नया और अनूठा रास्ता चुनते हुए निचले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया गया। इस सोची-समझी रणनीति का मुख्य उद्देश्य सीधे संघर्ष के जोखिम को न्यूनतम करना, ऑपरेशन की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करना और दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना अचानक व सटीक प्रहार करना था।

बदलते स्वरूप पर खुद को ढालना जरूरी

पूर्व सीडीएस ने कहा कि ऐसे ऑपरेशन्स के मूल्यांकन के लिए व्यापक नजरिए की आवश्यकता होती है। इसके तहत ऑपरेशन के दौरान सामने आई कमियों को पहचानना, उन्हें सुधारने के लिए कदम उठाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुसार खुद को ढालना बेहद आवश्यक है।

राजनीति, जोखिम और सेना की दोहरी भूमिका

प्रशियाई रणनीतिकार कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि किसी भी देश के राजनीतिक हित सर्वोपरि होते हैं और सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा के साधनों में से एक हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब सरकार बल प्रयोग का निर्णय लेती है, तब सैन्य नेतृत्व की दोहरी जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि सरकार को अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सैन्य विकल्पों की एक विविध और प्रभावी सूची उपलब्ध कराना। सरकार में यह विश्वास पैदा करना कि सशस्त्र बल इन विकल्पों को सफलतापूर्वक लागू कर सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भरोसा और विकल्पों की विविधता शांति के समय की तैयारियों कड़ी ट्रेनिंग, वॉरगेमिंग और आकस्मिक योजनाओं, पर निर्भर करती है।

पूर्व सीडीएस ने कहा कि जोखिम और राजनीतिक लक्ष्यों के बीच सही संतुलन बनाने की कला है। ऑपरेशन सिंदूर में उजागर हुई चुनौतियां और आधुनिक युद्ध प्रणाली का बदलता स्वरूप देश की भावी रक्षा रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा तय करते हैं।

(न्यूज एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)