गैस संकट से ऑटो और स्टील उद्योग पर गहराया खतरा, बढ़ सकते हैं वाहनों के दाम
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने से भारत के ऑटोमोबाइल, स्टील और एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित हो ...और पढ़ें

गैस संकट से ऑटो-स्टील मैन्यूफैक्चरिंग प्रभावित होने की आशंका।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस आपूर्ति के प्रभावित होने से अब ऑटोमोबाइल्स, स्टील व कई अन्य सेक्टर के एमएसएमई का निर्माण कार्य प्रभावित होने लगा है। सोसायटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल्स मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) और ऑटो पार्ट्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (एकमा) की तरफ से सरकार को गैस आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।
उनकी तरफ से कहा गया है कि गैस नहीं मिलने पर निर्माण प्रभावित होने के साथ उनकी लागत भी बढ़ सकती है। इससे ऑटमोबाइल्स के दाम भी बढ़ सकते हैं। स्टील के उत्पादन में भी गैस की अहम भूमिका होती है।
गैस के संकट को गहराता देख सरकार की तरफ से एलपीजी और पीएनजी की सप्लाई में घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता देने का निर्देश ऑयल व गैस कंपनियों को दिया गया है।
स्टेनलेस स्टील के निर्माण गैस पर निर्भर
जिंदल स्टेनलेस के एमडी अभ्युदय जिंदल ने बताया कि स्टेनलेस स्टील के निर्माण से जुड़ी यूनिट प्रोपेन, एलपीजी व अन्य प्राकृतिक गैस पर काफी हद तक निर्भर करती है। इनकी आपूर्ति प्रभावित होने से हमारी कई यूनिट का उत्पादन प्रभावित हुआ है। स्टेनलेस स्टील की यूनिट के पास अपना पावर प्लांट भी नहीं होता है और ये प्लांट गैस पर ही निर्भर करते हैं।
इंजीनियरिंग गुड्स के निर्माण में गैस का इस्तेमाल
सीमेंट, सेरामिक, लोहे से बनने वाले इंजीनियरिंग गुड्स के निर्माण में गैस का इस्तेमाल किया जाता है। फरीदाबाद स्थित ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनियों ने बताया कि सामान्य सप्लाई से अलग तरीके से गैस लेने पर काफी अधिक लागत आएगी और वे उतनी अधिक कीमत चुकाने में सक्षम नहीं है। वैसे भी कार व दोपहिया निर्माता कंपनियां को वे पहले से निर्धारित दर पर सप्लाई देती है।
गैस नहीं मिलने पर उत्पादन पर विपरीत असर
कार निर्माता कंपनियों का कहना है कि गैस नहीं मिलने पर उनके उत्पादन पर विपरीत असर होगा और देर होने से निर्माण की कुल लागत बढ़ जाएगी। गैस की निर्बाध आपूर्ति को देखते हुए पिछले कई सालों से निर्माण यूनिट धातुओं को पिघलाने से लेकर अन्य प्रकार के कई काम के लिए गैस पर ही निर्भर करती है।
इंजीनियरिंग गुड्स से जुड़े एमएसएमई ने बताया कि गैस की कमी से उत्पादन रोकने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं रहेगा। लंबे समय के लिए गैस नहीं मिलने पर उनके यहां काम करने वाले श्रमिकों के काम पर भी असर पड़ेगा। कई एमएसएमई उत्पादन जरूरत के हिसाब से श्रमिकों की संख्या बढ़ाते-घटाते रहते हैं। इस प्रकार के अस्थायी श्रमिकों का रोजगार छीन सकता है।
