इंदौर, राज्‍य ब्‍यूरो। कोरोना महामारी के दौर में निजी अस्पतालों की लापरवाही भी सामने आ रही है। ताजा मामला इंदौर के 65 वर्षीय गजल गायक का है। उनकी तबीयत खराब होने पर छह अप्रैल को उन्हें पहली बार एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें 23 अप्रैल को अस्पताल से कोरोना निगेटिव बताकर छुट्टी दे दी गई। इस बीच दो बार उनका कोविड-19 का टेस्ट किया गया और दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव बताई। 25 अप्रैल को अस्पताल से उन्हें फोन आया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बाद में प्रशासन व डॉक्टरों की टीम आई और उन्हें एमआरटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार को होम क्वारंटाइन किया गया।

17 दिन में दो लाख से अधिक का बिल बनाया 

गजल गायक उस्ताद आमिर खां के खानदान से हैं। उनका बेटा मुंबई में गायक है। बेटे ने निजी अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिता की पहली जांच सात अप्रैल को की गई थी, जिसकी रिपोर्ट नौ अप्रैल को निगेटिव बताई गई थी। इसके बाद भी उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। उन्हें निमोनिया हुआ था और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।

अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि चार-पांच दिन और रखना पड़ेगा। इसके बाद 12 अप्रैल को उनका दूसरा सैंपल लिया गया। इसकी रिपोर्ट कई दिन तक नहीं आई। हम अस्पताल प्रबंधन से पूछते रहे कि रिपोर्ट कब आएगी तो बताया गया कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है। आखिर 23 अप्रैल को रिपोर्ट निगेटिव आने की बात बताकर छुट्टी दे दी गई। इस बीच 17 दिन में अस्पताल ने हमसे 2.20 लाख रुपये फीस ले ली। जैसे-तैसे हमने यह फीस भरी।

स्वजन ने उठाया सवाल

शनिवार को तहसीलदार चरणजीत हुडा के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम गजल गायक को लेने पहुंच गई। अब स्वजन सवाल उठा रहे हैं कि आखिर संबंधित निजी अस्तपाल ने दो दिन पहले किस आधार पर छुट्टी दे दी थी। तबीयत ठीक नहीं थी तो हम कुछ दिन और अस्पताल में उनको रख सकते थे।

तहसीलदार का कहना है कि निजी अस्पताल ने किस आधार पर डिस्चार्ज किया, यह तो नहीं पता, लेकिन एमजीएम मेडिकल कॉलेज की ओर से जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने के बाद मरीज को कोविड अस्पताल एमआरटीबी में भर्ती कराया है। इस बारे में निजी हॉस्पिटल प्रबंधन से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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