जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में जी-20 संगठन की पहली बैठक की शुरुआत रविवार को उदयपुर में हो गई। इस बैठक में संगठन में शामिल सभी 20 देशों के अलावा भारत ने जिन 9 देशों को आमंत्रित किया हैं, उनके प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। साथ ही विश्व बैंक, आइएमएफ समेत दूसरी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। आगामी चार दिनों के दौरान कई दौर के विमर्श के बाद बनी सहमति का ब्यौरा बुधवार को जारी किया जाएगा, लेकिन अभी जो जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक तकनीक हस्तांतरण, ग्रीन टेक्नोलॉजी और वैश्विक मंदी से जुड़े मुद्दों पर मुख्य तौर पर बात की जाएगी। भारत की तरफ से बैठक में उठाये जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों का एक रोडमैप भी सभी देशों के समक्ष पेश किया जाएगा।

वैश्विक चुनौतियों के उपायों को किया जाएगा पेश

इस पहली बैठक में वित्त मंत्रालय में सचिव (आर्थिक मामलों के विभाग) अजय सेठ की तरफ से मौजूदा वैश्विक स्थिति की चुनौतियों और इससे निकलने के संभावी विकल्पों पर एक प्रस्तुतीकरण पेश की जाएगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की तरफ से भी वर्ष 2023 में वैश्विक इकोनॉमी की दशा व दिशा पर एक प्रस्तुतीकरण दिया जाएगा। साथ ही जी-20 में भारतीय शेरपा (किसी सम्मेलन की तैयारियों से जुड़े रूप-रेखा के विमर्श में संबंधित देश का प्रतिनिधि करने वाला अधिकारी) अमिताभ कांत की तरफ से अगले एक वर्ष के दौरान जी-20 बैठक के तहत भारत की प्राथमिकताओं को पेश करेंगे।

सभी को एकसाथ लेकर चलने की भारत की कोशिश

कांत ने एक सेमिनार में बताया कि पहले विकसित देश जी-20 बैठक का एजेंडा तैयार करते थे और विकासशील देशों को उसका पालन करने को देते थे। अब भारत यह एजेंडा तय करेगा। हम दुनिया को बताएंगे कि लोकतंत्र की शुरुआत भारत से ही हुई थी। वैसे भारत की प्राथमिकता को बाली शिखर बैठक में पीएम नरेन्द्र मोदी ने पेश किया था। बाद में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था कि भारत की कोशिश सभी देशों को साथ लेकर चलने की और विकासशील व गरीब देशों का प्रतिनिधित्व करने की होगी।

वैश्विक मंच का फायदा उठाने की कोशिश

कांत ने भी यह बात दोहराई है। उनका कहना है कि इस बैठक ने भारत को यह मौका दिया है कि वह वैश्विक मंच पर विकासशील देशों के हितों को प्रभावित करने वाले मुद्दे को उठा सके। उदयपुर बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर सभी देशों के बीच चर्चा होने की संभावना है उसमें विकासशील व गरीब देशों पर वैश्विक कर्ज के बोझ को करने से जुड़ा मुद्दा भी होगा। भारत की कोशिश होगी कि संयुक्त राष्ट्र की तरफ से निर्धारित 'सहस्त्राब्दि गोल' को लेकर फिर से वैश्विक मंच पर गंभीर चर्चा की शुरुआत हो। यह विश्व में गरीबी उन्मूलन के लिए बहुत जरूरी होगा।

जानें इस बैठक में क्या होगा

बता दें कि उदयपुर से जो चर्चाएं शुरू होंगी उसे वर्ष 2023 के शुरुआत में विदेश मंत्रियों और वित्त मंत्रियों की बैठक में आगे बढ़ाया जाएगा। जी-20 के तहत कई स्तरों पर विमर्श होगा। शेरपाओं की तरफ से तैयार एजेंडे पर सदस्य देशों के संबंधित मंत्रालयों व विभागों की तरफ से कार्य दल के स्तर पर बहस होगी। उसके बाद मंत्रीस्तरीय चर्चाएं भी होंगी। इस दौरान कम से कम दो बार सदस्य देशों व आमंत्रित देशों के विदेश मंत्री व वित्त मंत्री भारत की यात्रा पर आएंगे।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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