मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली। आखिरकार नूडल्स के विस्तृत मानक तय हो गए हैं। इसमें अब अंडे का पावडर, स्टार्च, सब्जियां, सूखे फल और मेवे आदि मिलाने की भी इजाजत होगी। इसी तरह भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने साबूदाना व कई और खाद्य सामग्रियों के लिए भी मानक तय कर लिए हैं। इसके मुताबिक साबूदाना में सफेद या मीठा करने वाले एजेंट का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

खाद्य प्राधिकरण ने खाद्य संरक्षा और मानक नियम 2011 में संशोधन के लिए अधिसूचना का मसौदा जारी कर दिया है। इसके मुताबिक मैकरोनी उत्पादों की श्रेणी के साथ अब इंस्टैंट नूडल्स का भी अलग से प्रावधान हो सकेगा। भले ही देश में नूडल्स उत्पाद लंबे समय से बिक रहे हों, लेकिन इसके लिए अलग से मानक नहीं होने की वजह से खाद्य प्राधिकरण से पास्ता की श्रेणी में लाइसेंस ले कर कंपनियां इंस्टेंट नूडल्स बना कर बेचती थीं।

प्राधिकरण ने तय किया है कि 'जरूरत होने पर इसमें स्टार्च, सब्जियां, सूखे फल, मेवे, खाने योग्य प्रोटीन और अंडे का पावडर मिलाया जा सकता है।' इसी तरह पिछले अनुभवों को देखते हुए साफ तौर पर कहा गया है कि इनमें 'अतिरिक्त (ऐडेड) रंग, अवांक्षित स्वाद, धूल, कीड़े-मकोड़े, लार्वा या किसी तरह की अशुद्धि नहीं होनी चाहिए।'

अब कंपनियां नूडल्स उत्पाद में वैरायटी भी ला सकेंगी। प्राधिकरण ने इसकी परिभाषा तय करते समय इसका पूरा ध्यान रखा है। इसमें कहा गया है कि 'ये ऐसे उत्पाद हैं जिनमें गेहूं, चावल या किसी भी अनाज, बाजरा अथवा फली के आंटे से बने हों, जिनमें मसाले हों या नहीं हों, लेकिन जिसे गूंदने में मुख्य अवयव पानी हो।' इसे फ्राइड और नॉन फ्राइड दोनों ही श्रेणी में लाने की इजाजत होगी। नूडल्स और इसके साथ आने वाली स्वाद बढ़ाने वाली पैकेट या सिजनिंग के लिए विस्तृत मानक तय करते हुए इसमें नमी, एसिड अघुलनशील राख, और एसिड का स्तर तय कर दिया गया है। फ्राय किए गए नूडल्स में जहां दस फीसदी से ज्यादा नमी नहीं हो सकती, वहीं बिना फ्राय किए नूडल्स में इसकी अधिकतम सीमा 13 फीसदी तय की गई है।

इसी तरह साबूदाना के लिए मानक तय करते हुए कहा गया है कि इसमें ब्लीचिंग, सफेद करने वाले एजेंट या ऑप्टिकल व्हाइटनर और मीठा करने वाले एजेंट का उपयोग नहीं होना चाहिए। प्राधिकरण ने टैपिओका और पाम दोनों तरह के साबूदाना को शामिल किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि साबूदाना में सल्फर डायऑक्साइड 100 पीपीएम से अधिक नहीं हो। प्राधिकरण ने मानकों का जो मसौदा जारी किया है, उसमें मैदे की एक अहम श्रेणी दड़ा (डूरम) गेहूं मैदा, बाजरे के आंटे और सुपर फुड की श्रेणी में आने वाले कनोआ भी हैं। इसके लिए नमी की अधिकतम सीमा से ले कर प्रोटीन की न्यूनतम सीमा भी तय कर दी गई है। इसी तरह इसके कण का आकार भी निर्धारित सीमा में रखना होना।

इंस्टेंट नूडल्स का मामला पिछले साल भारी विवाद में रहा था। कुछ जगहों पर इसके नमूने फेल हो जाने के बाद पिछले साल प्राधिकरण ने नेस्ले की मैगी नूडल्स को प्रतिबंधित भी कर दिया था। प्राधिकरण ने अपने ताजा मानकों में कहा है कि इंस्टैंट नूडल्स श्रेणी के उत्पादों में दूषित तत्व, विषैले तत्व और अवशिष्ट आदि की मात्रा ऐसे उत्पादों के लिए पहले से तय सीमा के अंदर होनी चाहिए। इनकी लेबलिंग और पैकेजिंग के लिए भी पहले से तय नियमों का पालन करना होगा।

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