डीजे बजाने से पहले जान लें ये 5 बड़े नियम, वरना सीधे जब्त हो सकता है साउंड सिस्टम
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गणेशोत्सव के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और पटाखों के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के ...और पढ़ें

लाउडस्पीकर और पटाखों की कानूनी डेसिबल सीमा
HighLights
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया।
डीजे, लाउडस्पीकर के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य है।
रात 10 बजे बाद उल्लंघन पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने त्योहारों के दौरान तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर बजाने और पटाखे फोड़ने पर सख्ती दिखाते हुए पुलिस व प्रशासन को नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
डीजे और लाउडस्पीकर के लिए क्या हैं नियम?
त्योहारों के दौरान लाउडस्पीकर या डीजे बजाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। कानून के मुताबिक क्षेत्रों के आधार पर ध्वनि सीमा तय की गई है, जिसे साउंड लेवल मीटर से मापा जाता है।
साइलेंस जोन: दिन में अधिकतम 50 dB / रात में 40 dB
रिहायशी क्षेत्र: दिन में 55 dB / रात में 45 dB
कमर्शियल क्षेत्र: दिन में 65 dB / रात में 55 dB
औद्योगिक क्षेत्र: दिन में 75 dB / रात में 70 dB
सुबह 6 से रात 10 बजे तक दिन और रात 10 से सुबह 6 बजे तक रात का समय माना जाता है।
रात में समय सीमा और छूट का प्रावधान
सामान्य तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले पटाखों पर पूर्ण रोक रहती है। हालांकि, राज्य सरकार सांस्कृतिक या धार्मिक त्योहारों के लिए साल में अधिकतम 15 दिनों तक रात 10 बजे से 12 बजे तक 2 घंटे की छूट दे सकती है।
लेकिन इस छूट के दौरान भी रिहायशी इलाकों में ध्वनि सीमा 55 डेसिबल से अधिक नहीं हो सकती। पटाखों के लिए आवाज की अधिकतम सीमा 125 डेसिबल निर्धारित की गई है।
नियम टूटने पर क्या हैं आपके अधिकार?
यदि आपके क्षेत्र में रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में डीजे या स्पीकर बजता है, तो आप तुरंत पुलिस से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस को उल्लंघन करने पर साउंड सिस्टम को जब्त करने, कार्यक्रम रोकने और संबंधित आयोजकों पर मामला दर्ज करने का पूरा अधिकार है।
राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) इन नियमों के पालन और निगरानी के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
