विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पायलटों के प्रशिक्षण से पहाड़ी उड़ानों तक, सुरक्षा कड़ी करने की सिफारिश

Published: Sat, 17 Oct 2026 05:55 AM (IST)

विमान हादसों पर लगाम लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआइबी) ने पायलटों के प्रशिक्षण और पहाड़ी इलाकों में उड़ानों की सुरक्षा कड़ी करने की सिफारिश की है।

पायलटों के प्रशिक्षण से पहाड़ी उड़ानों तक, सुरक्षा कड़ी करने की सिफारिश

पायलटों के प्रशिक्षण से पहाड़ी उड़ानों तक, सुरक्षा कड़ी करने की सिफारिश

HighLights

  1. मुंबई विमान हादसे के बाद प्रशिक्षण रिकॉर्ड की एकमुश्त जांच पर जोर

  2. केदारनाथ में अकेले हेलीकॉप्टर उड़ाने से पहले पहाड़ी उड़ानों का अनुभव जरूरी हो

पीटीआई, नई दिल्ली। विमान हादसों पर लगाम लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआइबी) ने पायलटों के प्रशिक्षण और पहाड़ी इलाकों में उड़ानों की सुरक्षा कड़ी करने की सिफारिश की है।

ब्यूरो ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से गैर-अनुसूचित और सामान्य विमानन सेवाएं देने वाले संचालकों के पायलटों के प्रशिक्षण रिकार्ड की एकमुश्त जांच करने को कहा है।

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सिम्युलेटर प्रशिक्षण के हर सत्र में सभी जरूरी अभ्यास कराए जा रहे हैं। इन अभ्यासों में विमान के चढ़ने, सामान्य उड़ान, उतरने की तैयारी और लैंडिंग के दौरान वायुगतिकीय स्टाल से उबरने का प्रशिक्षण भी शामिल है।

मुंबई हादसे के बाद प्रशिक्षण पर जोर

यह सिफारिश 14 सितंबर, 2023 को मुंबई हवाईअड्डे पर वीएसआर वेंचर्स के लियरजेट 45एक्सआर विमान (वीटी-डीबीएल) के दुर्घटनाग्रस्त होने की अंतिम जांच रिपोर्ट में की गई है।

इस हादसे में छह यात्रियों और चालक दल के दो सदस्यों को गंभीर चोटें आई थीं। विशाखापत्तनम से आ रहा विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और टैक्सीवे की एक लाइट भी टूट गई थी।

एएआइबी के मुताबिक, खराब मौसम के बावजूद अस्थिर एप्रोच जारी रखने और विमान को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाने के कारण कम ऊंचाई पर वायुगतिकीय स्टाल हुआ।

कम गति के संकेत मिलने के बाद भी पायलटों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई नहीं की। विमान को दोबारा ऊपर ले जाकर सुरक्षित उड़ान की स्थिति में लाने यानी गो-अराउंड का फैसला लेने में भी देरी हुई।

रिपोर्ट में खराब दृश्यता, पीछे से तेज हवा और समय पर उतरने के दबाव को भी हादसे से जुड़े कारकों में गिनाया गया है। ब्यूरो ने विमान संचालकों को प्रशिक्षण, आंतरिक सुरक्षा जांच और संचालन प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

अस्थिर एप्रोच होने पर किसी भी समय गो-अराउंड करने और विमान की तकनीकी लागबुक में सभी जरूरी प्रविष्टियां दर्ज करने पर भी जोर दिया गया है।

केदारनाथ में पहाड़ी उड़ानों का अनुभव जरूरी

एएआईबी ने एक अन्य रिपोर्ट में केदारनाथ घाटी में एकल-पायलट हेलीकाप्टर उड़ान से पहले पहाड़ी क्षेत्रों में न्यूनतम उड़ान अनुभव अनिवार्य करने की सिफारिश की है। साथ ही, सीतापुर नियंत्रण केंद्र और पायलट के बीच बातचीत की रिकार्डिंग करने का सुझाव दिया गया है।

आर्यन एविएशन का बेल 407 हेलीकाप्टर (वीटी-बीकेए) 15 जून, 2025 को केदारनाथ से गुप्तकाशी की शटल उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में छह यात्रियों और पायलट की मौत हुई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, पायलट का सीमित उड़ान अनुभव, अचानक घने बादलों का सामना और तेजी से नीचे उतरना हादसे से जुड़े प्रमुख कारण थे। मौसम बिगड़ने पर समय रहते रास्ता बदलने या वापस लौटने का फैसला नहीं लिया गया। एएआइबी के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच चारधाम क्षेत्र में आठ विमान दुर्घटनाएं और एक गंभीर घटना दर्ज की गई।