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लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह और माधव राव सिंधिया... सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान ही नहीं, मंत्रियों के इस्तीफे का रहा है लंबा इतिहास

Published: Sun, 26 Jul 2026 10:31 AM (IST)Updated: Sun, 26 Jul 2026 10:36 AM (IST)

नीट पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जो मोदी सरकार में एमजे अकबर ...और पढ़ें

मंत्रियों के इस्तीफे का लंबा इतिहास।

मंत्रियों के इस्तीफे का लंबा इतिहास।

HighLights

  1. धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक के बाद दिया इस्तीफा।

  2. लाल बहादुर शास्त्री ने ट्रेन हादसे की नैतिक जिम्मेदारी ली थी।

  3. कई मंत्रियों ने घोटालों या नैतिक कारणों से पद छोड़े।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों के आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने बीते दिन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

इस बड़े सियासी घटनक्रम के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है क्योंकि मोदी सरकार में एमजे अकबर के बाद धर्मेंद्र प्रधान ऐसे दूसरे मंत्री हैं जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है। साथ ही मंत्रियों के इस्तीफे का इतिहास भी बहुत पुराना है। इससे पहले भी कई मंत्रियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था।

चलिए खंगालते हैं इस इतिहास को...

लाल बहादुर शास्त्री

साल 1956 में तत्कालीन रेल मंत्री और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने तमिनलाडु के अरियालुर ट्रेन हादसे के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद मंत्री की जवाबदेही के लिए भारत में सबसे मजबूत मिसाल कायम हुई।

टीटी कृष्णमाचारी

साल 1958 में एलआईसी-मुंद्रा स्कैंडल के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी ने इस्तीफा दे दिया था।

वीके कृष्ण मेनन

साल 1962 में तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्णन मेनन ने भारत-चीन युद्ध में भारत की हार को लेकर हुई आलोचना के बाद अपना पद छोड़ दिया था।

वीपी सिंह

1987 में विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने एक संदिग्ध रक्षा सौदे और फेयरफैक्स जांच के विवादों के बीच देश के रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने बोफोर्स घोटाले के मुद्दे पर राजीव गांधी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और कांग्रेस पार्टी छोड़ दी।

माधव राव सिंधिया

माधवराव सिंधिया ने अपने राजनीतिक जीवन में मुख्य रूप से दो बार केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। पहला इस्तीफा जनवरी 1993 में नागरिक उड्डयन मंत्री पद से और दूसरा जनवरी 1996 में मानव संसाधन विकास मंत्री पद से।

जनवरी 1993 में जब वे नागरिक उड्डयन मंत्री थे तब उनके मंत्रालय द्वारा किराए पर लिया गया एक रूसी विमान (Tu-154) दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

जनवरी 1996 में चर्चित 'जैन हवाला कांड' (Hawala corruption scandal) में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से अपना दूसरा इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर अपनी एक अलग पार्टी (मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस) भी बनाई थी, लेकिन बाद में वे फिर से कांग्रेस में लौट आए थे।

नीतीश कुमार

नीतीश कुमार ने साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार के दौरान रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने यह कदम गैसाल ट्रेन हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उठाया था।

शिवराज पाटिल

साल 2008 में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद गृह मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इस हमले के बाद सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस को लेकर तत्कालीन सरकार की जमकर आलोचना हुई थी।

ए राजा

पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने 14-15 नवंबर 2010 को अपने पद से इस्तीफा दिया था। यह इस्तीफा बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से जुड़े आरोपों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के बाद भारी राजनीतिक दबाव के चलते दिया गया था।

दयानिधि मारन

दयानिधि मारन ने 7 जुलाई 2011 को केंद्रीय वस्त्र मंत्री (Textiles Minister) पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने यह कदम दूरसंचार घोटाले (2G Spectrum / Telecom Scandal) और सीबीआई की जांच के दबाव के चलते उठाया था।

पवन कुमार बंसल

पवन कुमार बंसल ने 10 मई 2013 को केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उनके भांजे विजय सिंगला की रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तारी के बाद आया था।

अश्वनी कुमार

पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्वनी कुमार ने 10 मई 2013 को कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने यह इस्तीफा कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले (कोलगेट मामले) की सीबीआई रिपोर्ट में कथित फेरबदल के विवाद के कारण दिया था।

एमजे अकबर

विदेश मामलों के राज्य मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ मी टू आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्होंने 17 अक्टूबर 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार में दूसरे मंत्री रहे जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों के आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।

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