नई दिल्ली, एएनआइ। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) विवाद के बाद भारत व चीन के सैनिकों में संघर्ष से पैदा हुई तनावपूर्ण स्थिति को सामान्य करने के लिए फिर पहल हुई है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर के बारहवें दौर की वार्ता के लिए नई तिथियों के निर्धारण पर काम शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, चीन ने पहले सैन्य वार्ता के लिए 26 जुलाई की तिथि सुझाई थी। लेकिन भारत ने उससे दूसरी तिथि पर बात करने के लिए कहा, क्योंकि भारतीय सेना उस समय कारगिल विजय दिवस मना रही होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अगले दौर की बैठक में डेपसांग, गोगरा व हाट स्पि्रंग से सैनिकों को वापस बुलाने के मुद्दे पर वार्ता हो सकती है।

भारत व चीन के सैन्य कमांडरों में ग्यारहवें दौर की वार्ता पूर्वी लद्दाख स्थित चुशूल में नौ अप्रैल को हुई थी। वार्ता में इस बात पर बल दिया गया था कि विवाद के बाकी क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने का रास्ता बनाएगी। दोनों देशों के बीच एक साल से ज्यादा समय से सैन्य तनातनी कायम है, लेकिन विभिन्न स्तरों की वार्ता के बाद दोनों देशों के सैनिक पैंगोंग झील से वापस हुए हैं।

गौरतलब है कि चीन की आक्रामक गतिविधियों के कारण अपने पड़ोसियों के लिए खतरा बना हुआ है। पिछले साल से लद्दाख में भारत के साथ सैन्य गतिरोध में लगी चीनी सेना ने उत्तराखंड के बाड़ाहोती क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है क्योंकि हाल में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की एक प्लाटून को सक्रिय देखा गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में पीएलए की एक प्लाटून (लगभग 35 सैनिकों) को उत्तराखंड के बाड़ाहोती इलाके के आसपास काम करते हुए देखा गया और आसपास के इलाके का सर्वेक्षण किया था। चीनियों को एक काफी दिनों के बाद इस क्षेत्र के आसपास कुछ गतिविधि करते देखा गया है। चीनी सैनिकों के वहां रहने के दौरान इलाके में लगातार नजर रखी जा रही थी। सूत्रों ने कहा कि भारतीय पक्ष ने भी इलाके में पर्याप्त इंतजाम किए हैं।