फ्रांस में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध के बावजूद सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, छात्र संगठनों ने पीछे हटने से किया इनकार
फ्रांस में 17 अक्टूबर को हुई हिंसा के बाद सरकार ने प्रदर्शनों पर शिकंजा कसा है और राष्ट्रपति मैक्रों ने अनाधिकृत विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की घोषणा की है।

फ्रांस में मैक्रों के प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शन जारी (फोटो-रॉयटर्स)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। फ्रांस में 17 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों, लूटपाट और आगजनी के बाद सरकार ने प्रदर्शनों पर शिकंजा कस दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आने वाले दिनों में उन प्रदर्शनों पर रोक लगाने की घोषणा की है, जिन्हें उनके मुताबिक वैध संगठनों की मंजूरी या अनुमति हासिल नहीं है।
हालांकि, इस सख्ती के बावजूद गुरुवार को पेरिस की सड़कों पर प्रदर्शनकारी उतर आए। इससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।
एपी के अनुसार, पेरिस पुलिस ने हिंसा की आशंका के चलते कई अहम इलाकों में प्रदर्शन पर रोक लगाई थी। इनमें राष्ट्रपति भवन, संसद के दोनों सदनों, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और मध्य पेरिस के वे इलाके शामिल थे, जहां दुकानों में लूटपाट हुई थी।
हालांकि, आयोजकों ने दावा किया कि शहर की प्रशासनिक अदालत ने प्रतिबंध रद कर दिया। अदालत के फैसले का पूरा ब्योरा तत्काल सार्वजनिक नहीं हुआ।
मैक्रों का सख्त संदेश, छात्र संगठन अड़े
रॉयटर्स के अनुसार, मैक्रों ने सुरक्षा अधिकारियों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक के बाद कहा कि श्रमिक संगठनों जैसे वैध समूहों को कानून के तहत प्रदर्शन की अनुमति मिल सकती है, लेकिन कारोबार और सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा के लिए उनके मार्च का रास्ता बदला जा सकता है। उन्होंने सप्ताहांत की हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और लूटपाट करने वालों को जिम्मेदार ठहराया
।दूसरी ओर, छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे विरोध जारी रखेंगे। फ्रांस के प्रमुख छात्र संगठन यूएनईएफ ने शनिवार को रैलियों का आह्वान किया है। सत्ता-विरोधी ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन ने भी मध्य पेरिस में मार्च निकालने की योजना बनाई है। लियोन में स्थानीय अधिकारियों ने शनिवार को प्रस्तावित सभी प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है।
दुकानों पर सुरक्षा, फिर हिंसा का डर
गौरतलब है कि पिछले शनिवार की घटनाओं में नकाबपोश युवाओं के समूहों की पुलिस से झड़प हुई थी। दुकानों में लूटपाट की गई और वाहनों को आग के हवाले किया गया। अशांति की आशंका से मध्य पेरिस के कारोबारियों ने दुकानों की खिड़कियों पर लकड़ी के पटरे लगाने शुरू कर दिए हैं। लग्जरी सामान बनाने वाली कंपनी एर्मेस ने भी फ्रांस में अपने स्टोरों की सुरक्षा बढ़ाने की जानकारी दी है।
हिंसा से प्रभावित इलाकों में लगातार तीसरी रात कर्फ्यू के दौरान कोई बड़ी घटना नहीं हुई, जिससे प्रशासन को कुछ राहत मिली। हालांकि, शनिवार को नए प्रदर्शनों की तैयारी ने चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि फ्रांस में प्रदर्शन का अधिकार संविधान से सुरक्षित है। ऐसे में सरकार की पाबंदियों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
बढ़ती महंगाई, घरेलू खर्च का दबाव और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर नाराजगी के बीच अब चुनौती यह है कि सरकार हिंसा पर लगाम लगाए और लोगों के विरोध के अधिकार की भी रक्षा करे।
इटली में ट्रकर्स की हड़ताल
इटली में ट्रकर्स के प्रदर्शनों ने दक्षिणी इटली में विश्व प्रसिद्ध बफेलो मोजेरेला चीज (भैंस के दूध से बननेवाली चीज) का उत्पादन ठप कर दिया है। अनुमान है कि महज 24 घंटे के अंदर 30 लाख यूरो कीमत के चीज का उत्पादन ठप हो गया। एपी के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनों के चलते ट्रकर्स ने नेपल्स क्षेत्र से दूध उठाकर डेयरियों तक नहीं पहुंचाया, जिससे बदले में तैयार चीज भी ग्राहकों तक नहीं पहुंच सकी।
ईरान युद्ध के चलते दक्षिणी इटली के तमाम पेट्रोल पंप खाली हो चुके हैं। देश में महंगे ईंधन के विरोध की वजह से ट्रक ड्राइवर हफ्तेभर से हड़ताल पर हैं। इससे बुनियादी जरूरतों की चीजें सुपरमार्केट तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
सबसे ज्यादा असर बफेलो मोजेरेला पर पड़ा है क्योंकि नियमत: दूध निकालने के 60 घंटे के भीतर मोजेरेला चीज बनाकर तैयार करनी होती है। मोजेरेला चीज उत्पादक संगठनों के समूह के डायरेक्टर पियर मालिया साकानी ने बताया कि अब तक 10 लाख लीटर दूध उत्पादक केंद्रों तक नहीं पहुंच सका, जिससे केवल 24 घंटे में 34 लाख डॉलर का नुकसान हो चुका है।
उन्होंने बताया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से चीज उत्पादन की लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वित्त वर्ष 2025 में 58,000 मीट्रिक टन चीज उत्पादन हुआ था, जिसका 37 प्रतिशत निर्यात किया गया था। इटली की पीएम जार्जिया मेलोनी ने इस हालात से निपटने के लिए आपात बैठक बुलाई है।
