जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में पिछले सात वर्षो से आतंक का चेहरा रहे इंडियन मुजाहिदीन का सह संस्थापक यासीन भटकल भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया। सीरियल बम धमाकों में 600 भारतीयों के कत्ल के जिम्मेदार भटकल को नेपाल सीमा के पास बिहार पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया गया।

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देश के 10 मोस्टवांटेड आतंकियों में शामिल यासीन को छह महीने तक चले ऑपरेशन के बाद आइबी के अधिकारी पकड़ने में सफल रहे। यासीन के साथ-साथ आइएम काबम विशेषज्ञ असदुल्लाह अख्तर भी गिरफ्तार कर लिया गया। आतंकवाद के खिलाफ इसे सुरक्षा एजेंसियों की बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार को बीएसएफ के विशेष विमान से दोनों को दिल्ली लाया जाएगा।

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लश्कर आतंकी अब्दुल करीम टुंडा के हत्थे चढ़ने के एक पखवाड़े के भीतर 35 लाख रुपये के ईनामी यासीन भटकल की गिरफ्तारी को आइबी की बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे आइएम के आतंकी नेटवर्क को समूल नष्ट करने में सफलता मिल सकती है। दरअसल 2008 में बटला हाउस मुठभेड़ और उससे जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी से आइएम की कमर टूट चुकी थी। लेकिन यासीन भटकल आइएसआइ की मदद से फिर से आइएम को खड़ा करने में सफल रहा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आइएम के नेटवर्क के एक-एक आतंकी को यासीन व्यक्तिगत रूप से जानता है। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियां यासीन से इस पर गहन पूछताछ करेंगी।

यासीन भटकल का आतंकी चेहरा पहली बार 2006 में मुंबई की ट्रेनों में सिलसिलेवार धमाके में सामने आया था। इसके बाद वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली, जयपुर, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलूर और हैदराबाद के धमाकों की साजिश में वह शामिल था। यासीन भटकल को देश के भीतर मौजूद सबसे बड़ा आतंकी चेहरा बताते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रियाज भटकल, इकबाल भटकल और आमिर रजा खान पाकिस्तान में बैठकर आइएसआइ की मदद से आइएम के फंड व अन्य संसाधन मुहैया कराने का काम करते हैं। लेकिन आइएम का असली कर्ताधर्ता यासीन भटकल ही है।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, गत 21 फरवरी को हैदराबाद में हुए दोहरे धमाके के बाद से यासीन भटकल निशाने पर था। दरअसल एक सीसीटीवी कैमरे में बम रखने वाले दो आतंकियों की तस्वीर कैद हो गई थी, जिनमें एक को यासीन के रूप में पहचाना गया था। हर बार धमाके कर बच निकलने वाला यासीन इस बार खुफिया एजेंसी के रडार पर आ गया। छह महीने तक पीछा करने और उसकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद आखिरकार उसके लिए जाल बिछाया गया। नेपाल से हिरासत में लाने के बाद खुफिया एजेंसी ने यासीन और असदुल्लाह अख्तर को नेपाल सीमा के पास रक्सौल में बिहार पुलिस के हवाले कर दिया। कड़ी निगरानी में उन्हें दोपहर बाद जिला मुख्यालय मोतिहारी लाया गया, जहां विभिन्न एजेंसियों ने उससे पूछताछ की। देर शाम उसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसपी सिंह की अदालत में पेश किया गया। वहां एनआइए ने पूछताछ के लिए रिमांड पर देने का आग्रह किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद एनआइए की टीम विशेष वाहन में लेकर सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गई। एनआइए के अधिकारी शुक्रवार को बीएसएफ के विमान से दोनों को लाने के लिए पटना जा रहे हैं।

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