नई दिल्ली, एजेंसियां। दो बार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रह चुके जगमोहन मल्होत्रा का सोमवार रात दिल्ली में निधन हो गया।  वे 94 वर्ष के थे। उनका जन्म 25 सितंबर, 1927 को पाकिस्तान के पंजाब स्थित हाफिजाबाद (Hafizabad) में हुआ था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के क्रम में तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने  जगमोहन से मुलाकात की और तब संपर्क अभियान की शुरुआत की थी। बता दें कि जम्मू कश्मीर में अहम रोल निभाने वाले जगमोहन का लुटियन दिल्ली के सौंदर्यीकरण में भी अहम योगदान रहा। दरअसल, 1975-77 में DDA के वाइस चेयरमैन का पद संभालते हुए उन्होंने वहां स्थित झुग्गियों को विस्थापित कराया था।

कश्मीरी पंडितों का मामला हो या आतंकवाद का निभाई अहम भूमिका  

आतंकवाद का सामना करने वाले जम्मू कश्मीर में पूर्व राज्यपाल के तौर पर जगमोहन ने अनेक सख्त फैसले लिए।  घाटी में कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार का मामला हो या आतंक से बचाव में रणनीति का मुद्दा जगमोहन कभी पीछे नहीं रहे। उन्होंने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन की रणनीति बनाई। साथ ही वहां होने वाले कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार को रोकने का भी पूरा प्रयास किया था।  

पद्मश्री, पद्मभूषण व पद्म विभूषण का सम्मान

दिल्ली और गोवा  के उपराज्यपाल का पद संभालने बनने से पहले वे प्रशासनिक सेवा में रहे। वर्ष 2016 में उन्हें पद्म विभूषण का सम्मान मिला था। वहीं 1971 में पद्मश्री और 1977 में पद्मभूषण के सम्मान से भी उन्हें नवाजा गया। रिटायर होने के बाद जगमोहन ने नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित IIC लाइब्रेरी में किताबों के साथ अधिकतर समय बिताया। पद्म विभूषण से सम्मानित जगमोहन राज्यपाल होने के अलावा केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। उन्हें दो बार जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल चुना गया था।  

ऐसा रहा जगमोहन का राजनीतिक सफर  

घाटी में राज्यपाल के तौर पर पहली बार 1984 में जगमोहन ने कार्यभार संभाला और 1989 तक पद पर बने रहे। दोबारा वर्ष 1990 में जनवरी-मई तक राज्यपाल के तौर पर कार्यभार संभाला। हालांकि उनका कार्यकाल विवादों में ही रहा।  तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने विपक्ष की आलोचनाओं के कारण उन्हें 1990 में कुछ ही महीनों में राज्यपाल के पद से हटा दिया था। 

1996 में लोकसभा के लिए चुने गए थे जगमोहन 

पहली बार वर्ष 1996 में उन्हें लोकसभा के लिए चुना गया था। लोकसभा में निर्वाचित जगमोहन ने दिल्ली और गोवा के उपराज्यपाल का पद भी संभाला। इसके अलावा उन्हें नगरीय विकास एवं पर्यटन मंत्री का कार्यभार भी सौंपा गया था।  उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान यह जिम्मा संभाला था।  

 

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