विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जर्मनी, रूस और यूक्रेन से गया जी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, फल्गु नदी के तट पर मंत्रोच्चार के साथ किया पिंडदान और तर्पण

Published: Sun, 04 Oct 2026 08:50 PM (IST)Updated: Sun, 04 Oct 2026 08:51 PM (IST)

बिहार के गया जी में चल रहे पितृ पक्ष मेले में जर्मनी, रूस, यूक्रेन और घाना सहित कई देशों के ...और पढ़ें

विदेशी नागरिकों ने गया जी में किया पिंडदान और तर्पण

विदेशी नागरिकों ने गया जी में किया पिंडदान और तर्पण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में इन दिनों अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आध्यात्मिकता का एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। गया जी जिले में चल रहे पितृ पक्ष मेले के दौरान शुक्रवार को जर्मनी, रूस, यूक्रेन और घाना जैसे कई देशों के विदेशी नागरिकों ने फल्गु नदी के किनारे पिंडदान और तर्पण किया।

विदेशी नागरिकों ने 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित पितृ पक्ष महासंगम मेले में मंत्रोच्चार के बीच हिंदू परंपराओं के अनुसार अनुष्ठानों में भाग लिया। इस मेले ने पर्यटकों को नदी, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न 'पिंड वेदियों' (पवित्र वेदियों) की ओर आकर्षित किया, जहां वे अपने पूर्वजों के लिए अनुष्ठान कर सकें।

पारंपरिक भारतीय कपड़े जैसे साड़ी और धोती-कुर्ता पहने हुए, तीर्थयात्रियों ने पवित्र स्थल पर प्रार्थना की और अपने दिवंगत परिवार के सदस्यों और दोस्तों को याद किया।

दो दिनों में 48 विदेशी नागरिक हुए मेले में शामिल 

समाचार एजेंसी पीटीआई को एक पुजारी लोक नाथ गौड़ ने बताया, 'लोग यहां अपने बेटों, पतियों, भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के लिए अनुष्ठान करने आते हैं।

इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड सहित कई यूरोपीय देशों के श्रद्धालु यहां अनुष्ठान करने आए हैं। दो दिनों में तीन बैचों में 48 लोग आए।'

उन्होंने बताया कि घाना जैसे अफ्रीकी देशों से भी कुछ लोग आए हैं। पुजारी ने उन तीर्थयात्रियों के बारे में बताया जो दुख की घड़ी में अपनों को खोने के बाद गया जी आए थे, जिनमें एक महिला भी शामिल थी जिसके दोस्त की उसके सामने ही नदी में डूबने से मौत हो गई थी।

विदेशी नागरिकों ने गया जी में किया पिंडदान और तर्पण

इटली के मिलान से पहली बार आई नतालिया ने बताया कि वह गया जी में अपने पूर्वजों की पूजा करने का अवसर पाकर आभारी हैं। उन्होंने कहा, 'मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।

मैं इस धरती का आभार व्यक्त करती हूं कि इसने हमें अपने पूर्वजों की पूजा करने का अवसर दिया।' जर्मनी की एक अन्य युवती ने भी कहा कि गया जी में अनुष्ठान करने के लिए आकर वह खुद को धन्य महसूस कर रही हैं।

(न्यूज एजेसी पीटीआई के इनपुट के साथ)