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खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी: त्योहारों पर जान से खिलवाड़

By Mahendra Pratap SinghEdited By: Naveen Kumar
Published: Mon, 26 Oct 2026 03:47 PM (IST)

दिवाली से पहले देश में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों की सेहत और पैसे दोनों को नुकसान हो रहा है।

(एआई द्वारा जनरेट की गई तस्वीर)

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संक्षेप में पढ़ें

देश में मिलावट खोरी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। दूध, पनीर और खोया से लेकर मिठाइयों में मिलावट आम है। त्योहार का सीजन चल रहा है और दिवाली आने वाली है। त्यौहारों में दूध, पनीर, खोया और मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है।

मिलावट खोर इस मौके का इंतजार करते हैं क्योंकि लोग त्योहार पर खाद्य पदार्थ सहित दूसरी चीजों की जम कर खरीदारी करते हैं। मिलावट खोरी रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां अभियान भी चलाती हैं और बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थ जब्त किए जाते हैं।

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हालांकि मिलावट खोरी पर इस अभियान का खास असर दिखाई नहीं देता है। लोग अनजाने में मिलावटी खाद्य पदार्थ खरीद कर अपनी सेहत के साथ पैसे का भी नुकसान कर रहे हैं। ऐसे में दिवाली से पहले मिलावट खोरी की गंभीर समस्या और इससे निपटने के लिए जिम्मेदार तंत्र की अक्षमता की पड़ताल प्रासंगिक है...

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तंत्र के अक्षम होने और चुनौतियों के कारण

  • संसाधनों व फूड इंस्पेक्टर्स की भारी कमी: एफएसएसएआई के तहत भारत में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और आधुनिक टेस्टिंग लैब की भारी किल्लत है।
  • असंगठित बाजार का दबदबा: भारत का लगभग 70-80% खाद्य कारोबार छोटे, असंगठित व खुले तौर पर बिकने वाले सामान का है, जिनकी सप्लाई चेन को ट्रैक करना कठिन होता है।
  • कानूनी पेचीदगियां और सिविल पेनाल्टी पर निर्भरता: अधिकतर मामलों को फौजदारी बनाने के बजाय केवल सिविल फाइन्स से निपटा दिया जाता है, जिससे मिलावटखोरों के मन में कानून का खौफ नहीं रहता।
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स्रोत: एफएसएसएआई की वार्षिक रिपोर्ट