छत्तीसगढ़: बस्तर में बाढ़ का पानी हुआ कम, 187 गांवों में तबाही के बाद मदद के लिए आगे आए हर समुदाय के लोग
जगदलपुर में जैन समाज के भवन पिछले दस दिनों से रसोई बने हुए हैं। दिगंबर जैन समाज रोज एक हजार ...और पढ़ें

छत्तीसगढ़ के बस्तर में बाढ़ का पानी हुआ कम (फोटो- पीटीआई)
HighLights
187 गांवों में तबाही के बाद मदद के लिए आगे आए हर समुदाय के लोग
किसी की रसोई में हजारों थालियां सजीं, किसी ने शरण देने खोला अपना घर
जेएनएन, जगदलपुर। बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन बेलगांव में तबाही के निशान अब भी हैं। बस्तर जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर इंद्रावती और भस्केल नदी की सीमा पर बसे इस गांव में कई घर मलबे में बदल गए हैं। छत गंवा चुके परिवारों को गांव के दूसरे पक्के मकानों में सहारा मिला है।
एक ही छत के नीचे कई परिवार साथ रह रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित 187 गांवों में जिंदगी धीरे-धीरे लौट रही है। इस बीच बस्तर में इंसानियत की धारा भी बहती दिखी। बाढ़ पीड़ितों को किसी ने भोजन दिया, किसी ने राशन और दवा, तो किसी ने अपना घर खोल दिया।
जगदलपुर में जैन समाज के भवन पिछले दस दिनों से रसोई बने हुए हैं। दिगंबर जैन समाज रोज एक हजार से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार कर डोंगाघाट, धोबीगुड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा रहा है।
समाज के अध्यक्ष अनूप जैन कहते हैं, “सुबह, दोपहर और रात जहां जरूरत की सूचना मिलती है, वहां भोजन पहुंचाया जा रहा है।”
श्वेतांबर समाज भी लगभग इतने ही लोगों के लिए रोज भोजन करा रहा है। अब गांवों में कंबल, कपड़े और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। बंगाली समुदाय और सर्व हिंदू समाज सहित अन्य संगठन भी गांवों तक पहुंच रहे हैं।
अंजुमन इस्लामिया कमेटी ने समाज भवन को राहत केंद्र बना दिया है। समाज के डा. जहीरुद्दीन बताते हैं कि यहां प्रभावितों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था है। सिख समाज ने शहर से गांव तक लंगर शुरू किए हैं।
श्री गुरुसिंह सभा के अध्यक्ष सरदार स्वर्ण सिंह बताते हैं कि कुरुषपाल और कोरपाल सहित कई गांवों में लगातार भोजन पहुंच रहा है। बस्तर चेंबर आफ कामर्स ने भी राहत के लिए भंडार खोले हैं।
