नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। उत्तर भारत के राज्यों में अभी भले ही बाढ़ की स्थिति गंभीर हो, लेकिन ये हालत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। अगले हफ्ते से मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही लोगों को इससे छुटकारा मिलने लगेगा। राष्ट्रीय आपदा मोचन समिति की उच्च स्तरीय बैठक में ये बात उभर कर सामने आई है। केंद्रीय कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली में बाढ़ के स्थिति की पड़ताल की गई।

मंगलवार को हुई बैठक में कैबिनेट सचिव ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली में बाढ़ की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने संकट से निपटने में राज्य सरकारों की तैयारियों तथा राहत व बचाव कार्यो का जायजा भी लिया और राज्यों द्वारा मांगी गई तात्कालिक सहायता के बारे में अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।

NDRF की 28 टीमें तैनात
बैठक में पाया गया कि अब तक राष्ट्रीय आपदा राहत बल NDRF की 28 टीमें इन राज्यों में तैनात की जा चुकी हैं। साथ ही सेना और वायुसेना के संसाधनों को सेवा में लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी।

चर्चा के दौरान मौसम विभाग की ओर से बताया गया कि वैसे तो इन राज्यों में पिछले कुछ दिनो के दौरान भारी वर्षा हुई है। किंतु आने वाले दिनों में इसकी सघनता कम होने से हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की आशा है। बैठक में राज्य आपदा राहत कोष से भी मदद भेजने के निर्देश दिए गए।

बैठक में गृह और रक्षा मंत्रालय के अलावा राष्ट्रीय आपदा राहत बल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। जबकि उक्त राज्यों के मुख्य सचिवों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बैठक में शिरकत की।

हिमाचल, उड़ीसा व कर्नाटक की आपदाओं पर अतिरिक्त मदद 
इससे पहले सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में, जिसमें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण तथा कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर भी मौजूद थे, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा तथा कर्नाटक को पूर्व में आई विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के सिलसिले में राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से 4432.10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने का निर्णय लिया गया था।

इसमें से हिमाचल प्रदेश को 64.49 करोड़ रुपये की राशि हिमस्खलन एवं बादल फटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए, जबकि उड़ीसा को 3338.22 करोड़ रुपये की राशि 'फानी' तूफान से हुए नुकसान के सिलसिले में मिलेगी। 'फानी' पीडि़तों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता के लिए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने गृहमंत्री को धन्यवाद दिया है। कर्नाटक को सूखा राहत के लिए केंद्र से 1929.39 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिली है।

उक्त राशियां केंद्र की ओर से राज्य आपदा राहत कोष SDRF से पहले ही दी जा चुकी सहायता के अतिरिक्त है। वर्ष 2018-19 में केंद्र ने सभी राज्यों को SDRF से 9,658 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी। जबकि 2019-20 में अब तक इस कोष से 6,104 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

बाढ़ प्रभावित राज्यों का जायजा लेंगी टीमें
केंद्र ने बाढ़ प्रभावित 11 राज्यों में हुए नुकसान के आकलन के लिए तत्काल प्रभाव से अंतरमंत्रालयी केंद्रीय टीमों (IMCT) के गठन का निर्णय लिया है। यह निर्णय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित सभी राज्यों में हर संभव उपाय करने का निर्देश भी दिया।

Posted By: Dhyanendra Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप