नई दिल्‍ली [आनलाइन डेस्‍क]। राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में शुक्रवार की शाम को आग लगने की एक भयावह घटना हुई। दिल्‍ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में शुक्रवार शाम आग लग गई। इस हादसे में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य झुलस गए। हादसे में घायल कुछ लोगों की हालत नाजुक बताई जाती है। इस हादसे ने 13 जून 1997 को दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा हाल में हुए भीषण अग्निकांड की याद दिला दी है। जानें उपहार सिनेमा हाल अग्निकांड में कहां हुई थी चूक...

59 लोगों की हुई थी मौत

राजधानी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा हाल में हुए भीषण अग्निकांड में 59 लोगों की जान चली गई थी। 13 जून 1997 को हुए इस भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के वक्‍त 'बार्डर' फिल्म का शो चल रहा था। शो के दौरान सिनेमाघर के ट्रांसफार्मर कक्ष में आग लगी थी जो तेजी से इमारत के अन्य हिस्सों में फैलती चली गई। हादसे में जान गंवाने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

बाहर हो रहे धमाकों को नहीं भांप सके थे सिनेमा देख रहे लोग  

इस भयावह अग्निकांड में कई परिवार तबाह हो गए थे। किसी ने अपने जिगर का टुकड़ा खोया तो किसी ने अपने घर का कमाने वाला इकलौता चिराग। किसी बहन ने अपना भाई तो किसी ने अपना पति खोया था। बताते हैं कि जिस समय सिनेमा हाल बाहर से आग की लपटों में घिरा हुआ था तब ट्रांसफार्मर फूटने समेत अन्य चीजों के जलने से जोरदार धमाके हो रहे थे लेकिन सिनेमा देख रहे लोग इससे अनजान थे। उनको लग रहा था कि ये धमाके बार्डर फ‍िल्‍म के हैं।

आपात स्‍थ‍िति में निकासी के नहीं थे 'पर्याप्‍त' इंतजाम

करीब बढ़ती मौत से अनजान लोग बार्डर फ‍िल्‍म के लड़ाई वाले सीन का आनंद ले रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक जब आग सिनेमा हाल के भीतर तक पहुंची तो लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। लोग दरवाजों की ओर भागे लेकिन कुछ दरवाजे बंद होने और आपात स्‍थ‍िति में निकासी का 'पर्याप्‍त' इंतजाम नहीं होने से लोग भीतर ही फंस गए। हाल के भीतर जहरीले धुंए ने लोगों की सांसें छीन ली। इस हादसे के भयावह मंजर को देख देश स्‍तब्‍ध था। पीडि़त परिवारों की चीखें दिल्‍ली को झकझोर रही थीं। 

गैर इरादतन हत्या और लापरवाही के आरोप

इस हादसे के बाद 24 जुलाई 1997 को सरकार ने सख्‍त रुख अपनाते हुए मामले की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआइ के हवाले कर दी थी। हादसे की प्रारंभिक छानबीन के दौरान पता चला था कि सिनेमाघर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। सीबीआइ ने 15 नवंबर 1997 को सुशील अंसल, गोपाल अंसल सहित 16 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। सत्र अदालत ने 27 फरवरी 2001 को सभी आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही के साथ तमाम आरोप तय किए गए।

सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था केस

यह मामला देश की सर्वोच्‍च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट और दिल्‍ली हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2002 को निचली अदालत को मामले का जल्द निपटारा करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2003 को 18 करोड़ रुपये का मुआवजा पीड़ितों के परिजनों को देने के निर्देश जारी किए। वहीं सेशन कोर्ट ने 20 नवंबर 2007 को सुशील और गोपाल अंसल समेत 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सभी को दो साल कैद की सजा सुनाई।

अदालतों में ऐसे चली सुनवाई

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने 4 जनवरी 2008 को अंसल बंधुओं को जमानत दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर 2008 को अंसल बंधुओं की जमानत रद कर दी थी। अंसल बंधुओं ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था जिस पर उच्‍च न्‍यायालय ने 19 दिसंबर 2008 को अंसल बंधुओं की सजा को दो साल से घटाकर एक साल कर दिया था। इस हादसे के पीड़ितों के संगठन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां तक कि सीबीआइ ने भी सर्वोच्‍च अदालत से अभियुक्तों की सजा बढ़ाने की मांग की थी।

सर्वोच्‍च अदालत ने सजा को रखा था बरकरार

देश की सर्वोच्‍च अदालत ने 5 मार्च 2014 को अंसल बंधुओं की सजा को बरकरार रखा था। साल 2018 में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। यही नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने दिसंबर 2018 को दोषियों को पासपोर्ट जारी करने वाले अधिकारी कि खिलाफ भी केस दर्ज करने का आदेश दिया था। देश के इस चर्चित अग्निकांड को लेकर छपी रिपोर्टों में उपहार सिनेमा हाल को लाक्षागृह तक करार दिया गया था। सनद रहे देश में जब भी कोई बड़ा अग्निकांड होता है तो उपहार सिनेमा हाल हादसे की दुखद यादें ताजा हो जाती हैं। 

Edited By: Krishna Bihari Singh