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गिरमिटिया से जुड़े तीन बंदरगाहों को यूनेस्को दर्जा दिलाने की मांग, फिजी उच्चायुक्त ने भारत से किया आग्रह

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:56 PM (IST)

फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने भारत सरकार से कोलकाता, विशाखापत्तनम और चेन्नई बंदरगाहों को गिरमिटिया मजदूरों की याद में ...और पढ़ें

गिरमिटिया से जुड़े तीन बंदरगाहों को यूनेस्को दर्जा दिलाने की मांग।

गिरमिटिया से जुड़े तीन बंदरगाहों को यूनेस्को दर्जा दिलाने की मांग।

HighLights

  1. फिजी उच्चायुक्त ने भारतीय बंदरगाहों के लिए यूनेस्को दर्जे की मांग की।

  2. यह मांग गिरमिटिया मजदूरों की याद में की गई है।

  3. सांस्कृतिक संस्थानों को साझा विरासत संरक्षण पर मिलकर काम करना चाहिए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में फिजी के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने बुधवार को भारत सरकार से कोलकाता, विशाखापत्तनम और चेन्नई के बंदरगाहों के लिए यूनेस्को से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मांगने की पहल पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने गिरमिटिया मजदूरों की याद में यह कदम उठाने का आग्रह किया है।

फिजी के उच्चायुक्त ने यहां विज्ञान भवन में भारत की सभ्यतागत विरासत पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संस्थानों को अभिलेखों के संरक्षण और अपनी साझा विरासत के दस्तावेजीकरण के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि इन साझा संबंधों को सार्थक सहयोग में बदला जा सकता है।

सामी ने पिछली दो शताब्दियों में की गईं उन भारतीयों की कठिन समुद्री यात्राओं का जिक्र किया, जिन्हें गिरमिटिया मजदूरों के रूप में काम करने के लिए विभिन्न देशों में भेजा गया था। उन्होंने खुद को गिरमिटिया बताया और कहा कि उनके पूर्वज 1900 के दशक में दक्षिण भारत से फिजी गए थे।

उन्होंने कहा, 'फिजी मेरी जन्मभूमि है और भारत मेरी मातृभूमि।'

गिरमिटिया शब्द का प्रयोग उन भारतीयों के लिए किया जाता है, जिन्हें फिजी, सूरीनाम, मालदीव और मारीशस जैसे देशों में बागानों में अनुबंधित मजदूरों के रूप में काम करने के लिए ले जाया गया था। उनके गीतों में जहाजों से की गई लंबी और जोखिम भरी यात्राओं का इतिहास आज भी संजोया हुआ है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)