वाराणसी, जेएनएन। सुबह-सुबह चाय की चुस्की...आंखों में इंतजार और दिलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खूब सारा प्यार... ऐसा नजारा था आज (सोमवार) सुबह वाराणसी का। खासकर पूरे देश भर में चर्चित 'पप्पू की अड़ी' का। 'पप्पू की अड़ी' यहां का सबसे लोकप्रिय चाय का स्टॉल है। यहां पर चाय का लुत्फ उठाने वालों में सामान्य व्यक्ति से लेकर मशहूर शख्सियत तक सभी शामिल होते हैं। इस दौरान राजनीति को लेकर भी खूब चर्चा होती है। यही वजह है कि इस स्टॉल के ऊपर लगे बोर्ड पर भी लिखा हुआ है 'भारत की राजनीति को दिशा देने वाला विश्व प्रसिद्ध 'पप्पू की अड़ी'। सबसे पहले तो आपको बता दें कि सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में हैं।  

चंद्र प्रकाश जैन जोकि पेशे से एक लोकल बिजनसमैन है। रोज की तरह अपने चाय का आनंद लेने के लिए पप्पू की दुकान पर पहुंचे। उन्होंने बताया की पीएम मोदी के आने से पहले सभी लोग उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग उनका धन्यवाद करना चाहते हैं। उन्होंने वाराणसी में काफी विकास कार्य किए हैं।

श्रीधर पांडेय गंगा घाट के एक ज्योतिषि ने कहा कि पीएम मोदी एक अनोखे नेता हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के उनके प्रति प्यार की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यह अपने आप में अद्भूत है कि जीत के बाद पीएम खुद लोगों का धन्यवाद करने के लिए यहां आ रहे हैं। इससे ही साफ हो जाता है कि पीएम मोदी कितने दयालु और अनोखे नेता हैं। पिछले पांच सालों में उनके लगातार किए गए कामों ने लोगों के मन में उनके लिए प्यार और बढ़ा दिया है। 

एक स्थानीय पत्रकार आर मिश्रा ने बताया कि कि पीएम मोदी की क्षमता पर संदेह नहीं किया जा सकता है।  पिछली बार वाराणसी ने अपने सांसद  को चुना था, लेकिन इस बार काशी ने देश का प्रधानमंत्री चुना है। वाराणसी के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। हम मोदीजी को धन्यवाद देना चाहेंगे कि उन्होंने वाराणसी की छवि को बदल दिया है। काशी हमेशा पीएम मोदी के साथ है। 

'पप्पू की अड़ी' के मालिक के बेटे मनोज जो सुबह से चाय की दुकान संभाल रहा है उसने कहा कि हम पूरे दिल से पीएम मोदी का स्वागत करते हैं। हमे उनपर और उनके वादों पर पूरा भरोसा है। पीएम मोदी के आने से एक दिन पहले ही सारी तैयारियां कर ली गई थीं। पूरे क्षेत्र में भाजपा के झंडे लगा दिए गए हैं। 

बेहद लोकप्रिय है 'पप्पू की अड़ी'
मशहूर उपन्यासकार काशीनाथ सिंह ने अपनी कृति 'काशी का अस्सी' में भी 'पप्पू की अड़ी' को स्थान दिया है। लंका के टंडन जी की चाय अड़ी की तरह। 1918 में भी, जब काशी के ब्राह्मण चाय को 'चाह' कहते और अंग्रेजों का पेय होने के कारण पीने से परहेज करते। बाद में यह उनके घर चुपके से जाने लगी।  

क्या है चाय में खास 
क्या खास है आपकी चाय में? पप्पू का जवाब सीधा और बनारसी है। बोले, चाय पिलाने के अंग्रेजी तरीके का भारतीय संस्करण होने के नाते लोग पसंद करने लगे। पप्पू के यहां गर्म पानी और चाय पत्ती को मिलाकर पेय अलग से तैयार रहता है (इसे लीकर बोला जाता है) जिसे गिलासों में पहले से पड़े दूध, चीनी या नींबू में डाला जाता है। वैसे यह तरीका दालमंडी और नई सड़क की तरफ भी काफी प्रचलित है।

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Ayushi Tyagi

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप