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त्योहारी सीजन में महंगाई की मार, पर खरीददारी भी होगी धुआंधार; 20 प्रतिशत तक बिक्री बढ़ने के आसार

Published: Wed, 30 Sep 2026 11:40 PM (GMT+05:30)

पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से कपड़ों के दाम 10% से अधिक बढ़ गए हैं।

पश्चिम एशिया संकट से कपड़ों के दाम 10% से अधिक बढ़े

पश्चिम एशिया संकट से कपड़ों के दाम 10% से अधिक बढ़े

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण सिर्फ फ्रिज, टीवी, एसी जैसे घरेलू आइटम के दाम ही नहीं बढ़े हैं, कपड़ों के दाम में भी पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हो चुका है। गारमेंट निर्माता इसकी मुख्य वजह कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी को बता रहे हैं।

पश्चिम एशिया संकट के कारण पेट्रोलियम पदार्थों के महंगा होने से पोलिस्टर की कीमत पिछले एक साल में 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। काटन के दाम भी बढ़ चुके हैं। पिछले एक साल में डालर के मुकाबले रुपए के मूल्य में भी ह्रास हुआ है जिससे सभी आयातित सामान महंगे हो गए हैं।

हालांकि गारमेंट व्यापारियों का कहना है कि दाम बढ़ने के बाद भी त्योहारी सीजन में पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक बिक्री की उम्मीद है। दूसरे आइटम की बिक्री में भी आठ से दस फीसद बढ़ोत्तरी की उम्मीद है।

कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज (सिटी) के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण सभी प्रकार के कच्चे माल के दाम 20 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है।

लेकिन निर्माताओं ने गारमेंट के दाम में 10 से 15 प्रतिशत तक का ही इजाफा किया है। उन्हें उम्मीद है कि त्योहारी सीजन में बिक्री अधिक होगी, इसलिए वे कम मार्जिन पर बिक्री की तैयारी में है।

क्लोथ मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक कपड़ा निर्माताओं को इस साल त्योहारी सीजन में कपड़ा की बिक्री में 20 प्रतिशत से अधिक बिक्री की उम्मीद है। कपड़ा निर्माताओं के मुताबिक महिला से लेकर पुरुष तक सभी प्रकार के कपड़ों की कीमत बढ़ चुकी है।

कपड़ा निर्माताओं ने बताया कि नवरात्र के आरंभ होने के बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से ही बिक्री में बढ़ोतरी का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।

दूसरी तरफ ई-कामर्स कंपनियों की त्योहारी बिक्री आगामी नौ अक्टूबर से शुरू हो रही है। ई-कामर्स कंपनियां गारमेंट की कीमत पर 40 से 50 प्रतिशत तक की छूट देते हैं। ई-कामर्स प्लेटफार्म पर होने वाली कुल बिक्री में करीब 35 प्रतिशत हिस्सेदारी कपड़ों की हो चुकी है। कई प्लेटफार्म सिर्फ कपड़ों की बिक्री करते हैं।