नई दिल्ली, प्रेट्र। समावेशी, निष्पक्ष, न्यायोचित और तार्किक तरीके से स्थायी कमीशन, पदोन्नति और उसके लाभ के लिए 11 महिला सैन्य अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार को शीर्ष अदालत के पिछले साल फरवरी के आदेश का अनुपालन करने के निर्देश देने की मांग की है।

स्थायी कमीशन प्रदान करने की प्रक्रियाएं मनमानी, पक्षपातपूर्ण और अनुचित हैं

लेफ्टिनेंट कर्नल आशु यादव और 10 अन्य महिला सैन्य अधिकारियों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि निर्देशों का उनकी भावना के अनुरूप पालन नहीं किया जा रहा था। उनका आरोप है कि स्थायी कमीशन प्रदान करने की प्रक्रियाएं मनमानी, पक्षपातपूर्ण और अनुचित हैं। याचिका पर 27 जनवरी को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।

पिछले साल 17 फरवरी के आदेश का अनुपालन करने के निर्देश देने की मांग

याचिका के मुताबिक, प्रतिवादी संस्था महिला अधिकारियों को तकनीकी एवं प्रक्रियागत औपचारिकाताओं में फंसाकर और उनके अधिकारों से वंचित करके असमान व्यवहार करने के अपने रुख पर अड़ी हुई है। केंद्र सरकार के व्यवहार से लगता है कि वह इन महिला अधिकारियों के साथ मनोवैज्ञानिक खेल खेल रही है ताकि उन्हें स्थायी कमीशन, पदोन्नति और उनके लाभ प्रदान करने की हर संभावना से बचा जा सके। यह 17 फरवरी, 2020 के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है।

महिला अधिकारियों को समयावधि के आधार पर कर्नल रैंक प्रदान करने की मांग

याचिका में महिला अधिकारियों को समयावधि के आधार पर कर्नल की रैंक प्रदान करने और काफी समय से लंबित वित्तीय बकायों का भुगतान करने समेत निष्पक्ष नीति लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

शार्ट सर्विस कमीशन की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के निर्देशों को दी गई चुनौती

याचिका में शार्ट सर्विस कमीशन की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए आवश्यक स्पेशल बोर्ड-5 से संबंधित एक अगस्त, 2020 के सामान्य निर्देशों और स्पेशल बोर्ड-3 के आयोजन के लिए किसी नीति के अभाव को चुनौती दी गई है।

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