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FCRA संशोधन विधेयक 2026: मंत्रालयों ने JPC को दी जानकारी, विपक्ष ने उठाए सवाल

Published: Tue, 29 Sep 2026 11:23 PM (IST)

गृह और विधि मंत्रालयों ने FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को विस्तृत जानकारी दी, जबकि विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला बताया।

एफसीआरए बिल पर चिंताओं के निराकरण को जेपीसी के सामने रखा।

एफसीआरए बिल पर चिंताओं के निराकरण को जेपीसी के सामने रखा।

HighLights

  1. मंत्रालयों ने FCRA संशोधन विधेयक पर JPC को जानकारी दी।

  2. विपक्ष ने विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताया, सरकार ने नकारा।

  3. एसबीआई ने एनजीओ फंड प्रबंधन पर स्पष्टता की मांग की।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) को लेकर देश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। मंगलवार को गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बेहद संवेदनशील और बहुचर्चित विधेयक की एक-एक धारा पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को विस्तार से जानकारी दी।

भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय इस समिति का गठन इस कानून के दूरगामी प्रविधानों की गहराई से समीक्षा करने के लिए किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान अधिकारियों ने साल 2010 के मूल कानून में संशोधन लाने के पीछे के ठोस कारणों और इसके भावी प्रभावों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।

गौरतलब है कि विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले सभी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है और गृह मंत्रालय नोडल एजेंसी के रूप में इनकी गतिविधियों पर करीब से नजर रखता है।

यह विधेयक इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और विपक्षी दलों की लगातार मांगों के बाद 12 अगस्त को जेपीसी के पास भेज दिया गया था। कांग्रेस और द्रमुक सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों ने इस विधेयक के कुछ प्रविधानों को लेकर गहरी चिंता और आपत्ति जताई है।

विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है, जिससे ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यक संचालित सामाजिक कल्याण व शैक्षणिक संस्थानों के वैध वित्त पोषण (फंडिंग) में भारी रुकावट आएगी।

दूसरी ओर, सरकार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्षी दलों को चुनौती दी है कि वे एक भी ऐसा प्रविधान दिखाएं जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो। सरकार का स्पष्ट मत है कि यह प्रस्तावित कानून किसी विशेष धर्म से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका एकमात्र उद्देश्य विदेशी अंशदान को पारदर्शी तरीके से विनियमित करना है।

इस बीच, कांग्रेस सांसद एंटो एंटोनी और द्रमुक सांसद पी. विल्सन सहित जेपीसी के कई सदस्यों ने विधेयक की महत्ता और व्यापक प्रभावों का हवाला देते हुए समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को होने वाली बैठक को कम से कम चार सप्ताह के लिए टालने का अनुरोध किया है।

एनजीओ फंड के प्रबंधन पर एसबीआई ने मांगी स्पष्टता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के उद्देश्यों का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही एनजीओ का विदेशी चंदा प्राप्त करने का लाइसेंस रद होने पर बैंक खातों व जमा राशि के प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियमों की मांग की है।

मंगलवार को विधेयक की समीक्षा कर रही संसदीय समिति के सामने एसबीआइ के चेयरमैन सीएस सेट्टी के नेतृत्व में अधिकारियों ने प्रस्तुति दी। एसबीआई ने पंजीकरण समाप्त होने और बैंक को इसकी सूचना मिलने के बीच के अंतराल में होने वाले लेनदेन पर सवाल उठने की आशंका जताई है।

इसने सुझाव दिया कि प्रतिबंध तभी प्रभावी होने चाहिए जब बैंक को आधिकारिक सूचना मिले और उससे पहले हुए लेनदेनों को सुरक्षा दी जाए।

इसके अलावा, एसबीआई ने खाता फ्रीज करने, सरकारी नियंत्रण के बाद खाता संचालित करने वाले प्राधिकारी, इनकमिंग भुगतानों और मौजूदा फिक्सड डिपॉजिट व ब्याज के निपटारे पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)