जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। क्रियान्वयन में कई दिक्कतों के बावजूद सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित टोल प्लाजा से गुजरने के लिए वाहनों पर फास्टैग का उपयोग रविवार से अनिवार्य कर दिया है। हालांकि बिना फास्टैग वाले वाहनों की सहूलियत के लिए कम से कम एक-चौथाई लेन को एक महीने तक हाइब्रिड लेन में बदलने की व्यवस्था की है।

कैश भुगतान भी स्वीकार्य होगा

इसका मतलब यह है कि यदि किसी टोल प्लाजा में आठ लेन हैं तो वहां दो लेन में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के अलावा कैश भुगतान भी स्वीकार्य होगा। इसी प्रकार जहां 12 लेन हैं वहां तीन लेन कैश के लिए भी खुली होंगी। इन लेन में बिना जुर्माने के कैश में भी टोल का भुगतान स्वीकार किया जाएगा। जिन वाहनों में फास्टैग नहीं लगा होगा, उनके चालक ऐसी लेन में प्रवेश कर नकद में टोल का भुगतान कर सकेंगे। अभी तक केवल एक लेन में ही कैश भुगतान की सुविधा होने से लंबी कतारें लग जाती थीं।

सड़क मंत्रालय ने एनएचएआइ से कहा- हाइब्रिड लेनों की संख्या कम से कम हों

सड़क मंत्रालय ने एनएचएआइ से कहा है कि वाहन चालकों को सुविधा देने के साथ-साथ उसका प्रयास हाइब्रिड लेन की संख्या को कम से कम रखने का होना चाहिए, ताकि लोग जल्दी से जल्दी फास्टैग लेने का प्रयास करें। किसी भी हालत में फास्टैग लेनों का प्रतिशत 75 फीसद से कम नहीं होना चाहिए।

बिना जुर्माने के कैश भुगतान की सुविधा सिर्फ 30 दिन तक, उसके बाद दो गुना टोल वसूला जाएगा

इसके अलावा बिना जुर्माने के कैश भुगतान की सुविधा सिर्फ 30 दिन तक दी जाएगी। उसके बाद कैश लेन में जाने वाले चालकों से दोगुना टोल वसूला जाएगा।इससे पहले एनएचएआइ ने मुश्किलें गिनाते हुए सड़क मंत्रालय से फास्टैग अनिवार्यता की तारीख बढ़ाने अथवा 45 दिनों तक एक से अधिक लेन को हाइब्रिड लेन में बदलने की अनुमति मांगी थी।

चिपों की कमी से फास्टैग की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम है

एनएचएआइ का कहना था कि देश में चिप का पर्याप्त उत्पादन नहीं होने से फास्टैग की आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम है। बीती छह दिसंबर तक देश में रोजाना 1.9 6 लाख फास्टैग जारी हो रहे थे। फास्टैग में आयातित चिप के उपयोग और उसकी बढ़ती मांग को देखते हुए एनएचएआइ ने पांच-छह दिसंबर को टैग निर्माताओं तथा बैंकों के साथ स्थिति की समीक्षा की। अभी फास्टैग निर्माताओं की कुल दैनिक उत्पादन क्षमता भी अधिकतम 50 हजार टैग बनाने की ही है। निर्माताओं के पास पहले से 18 लाख फास्टैग की आपूर्ति के ऑर्डर पड़े हुए हैं। एनएचएआइ के अनुरोध पर ही सड़क मंत्रालय ने इससे पूर्व फास्टैग अनिवार्यता की तारीख को पहली दिसंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर किया था।

फास्टैग में प्रयुक्त चिप देश में नहीं बनती

बढ़ती मांग को देखते हुए एनएचएआइ ने 5 व 6 दिसंबर को टैग निर्माताओं तथा बैंकों के साथ स्थिति की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि फास्टैग में प्रयुक्त चिप देश में नहीं बनती। निर्माताओं को इसका आयात करना पड़ता है, जिसमें कम से कम छह हफ्ते लग जाते हैं। सभी फास्टैग निर्माताओं की कुल दैनिक उत्पादन क्षमता भी अधिकतम 50 हजार टैग बनाने की ही है। निर्माताओं के पास पहले से 18 लाख फास्टैग की आपूर्ति के आर्डर पड़े हुए हैं।

फास्टैग अनिवार्यता की तारीख 1 दिसंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर किया था

एनएचएआइ के अनुरोध पर ही सड़क मंत्रालय ने इससे पूर्व फास्टैग अनिवार्यता की तारीख को 1 दिसंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर किया था।

Posted By: Bhupendra Singh

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