नई दिल्ली, प्रेट्र। अदालतों में लंबित मामलों का हाल यह है कि देश के 389 जिलों में बाल दु‌र्व्यवहार के लंबित मामलों की संख्या सौ फीसद तक पहुंच गई है। अदालतों के लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए कानून मंत्रालय ने उन सब जिलों में एक-एक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। इन कोर्ट से हजारों-लाखों की संख्या में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलेगी।

कानून मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) से बाल दु‌र्व्यवहार के हजारों लंबित मामलों में जल्द फैसला हो सकता है। अनेक जिलों में दुष्कर्म, छेड़छाड़ तथा यौन उत्पीड़न के बाल दु‌र्व्यहार के हजारों मामले लंबित चल रहे हैं। पॉक्सो एक्ट के तहत आने वाले लंबित मामलों की संख्या अनेक जिलों में सौ फीसद तक पहुंच गई है।

देश के 389 जिलों में लंबित हैं बाल दु‌र्व्यवहार के शत प्रतिशत मामले

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन सभी जिलों में जहां बाल दु‌र्व्यवहार के मामले शत प्रतिशत लंबित हैं वहां पर एक-एक पॉक्सो कोर्ट भी स्थापित किए जाएंगे। इन कोर्ट में बाल दु‌र्व्यवहार से जुड़े मामलों के अलावा अन्य कोई मामले नहीं लिए जाएंगे।

पॉक्सो से जुड़े मामलों के जल्द से जल्द से निपटारे के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें अपने राज्य की हाई कोर्ट के साथ मिलकर यह भी तय करेंगी कि क्या लंबित मामलों को निपटाने के लिए संबंधित जिलों में एक या एक से अधिक पॉक्सो कोर्ट स्थापित करने की जरूरत है।

1.66 लाख लंबित मामलों के निपटारे के लिए 1023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित होंगे

केंद्र सरकार ने बाल एवं महिलाओं से जुड़े अपराध के 1.66 लाख लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए देश में कुल 1023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। इन कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि वे प्रति वर्ष कम से कम 165 ऐसे मामलों का निपटारा कर देंगे।

389 कोर्ट पॉक्सो एक्ट के तहत, 634 अदालतें दुष्कर्म तथा यौन उत्पीड़न के मामले देखेंगी

शीर्ष कोर्ट के निर्देशानुसार इन 1023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में से 389 कोर्ट सिर्फ पॉक्सो एक्ट के तहत आने वाले मामलों की ही सुनवाई करेंगे जबकि 634 अदालतें दुष्कर्म तथा यौन उत्पीड़न के मामले देखेंगी। इन अदालतों में जरूरत के मुताबिक पॉक्सो एक्ट के तहत आनेवाले मामलों की भी सुनवाई हो सकेगी। ये अदालतें तीन माह में कम से कम 41-42 मामलों का निपटारा कर देंगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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