नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) ने किसानों से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के कृषि कानूनों पर रोक लगाने के फैसले के बाद उन्हें अपना आंदोलन निलंबित कर देना चाहिए। बीसीआइ ने सुप्रीम पर की गई टिप्पणियों और आलोचनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि न्यायपालिका का सम्मान किया जाना चाहिए। ये देश की आखिरी उम्मीद है इसकी छवि खराब नहीं की जानी चाहिए। बीसीआइ के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी प्रपत्र में किसानों के मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सराहना की गई है। इसमें कहा गया कि मामले की गंभीरता समझने और देश को अराजकता की स्थिति से बचाने के लिए मामले में दखल देने के लिए देश सुप्रीम कोर्ट का आभारी है। लोगों को कोर्ट के आदेश की सराहना करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाया गया कदम देशहित में है और ऐतिहासिक है। कोर्ट का उद्देश्य आंदोलन कर रहे बुजुर्ग, महिला और बच्चों को कड़ाके की ठंड और कोरोना संक्रमण से बचाने का है। बीसीआइ ने कहा कि वह और पूरी वकील बिरादरी कृषि कानूनों में एसडीएम और एडीएम को न्यायिक अधिकार दिये जाने के प्रविधान का विरोध करती है। इसीलिए उसने किसानों के आंदोलन का समर्थन किया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है, जिसे देखते हुए किसानों को अपना आंदोलन निलंबित कर देना चाहिए। 

कुछ राजनीतिकों की सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ टिप्पणियां दुर्भाग्यपूर्ण

बीसीआइ ने कहा कि कुछ राजनीतिकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ की गई गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियां दुर्भाग्यपूर्ण हैं। किसी भी संवेदनशील राजनेता से ऐसी टिप्पणियों की उम्मीद नहीं की जाती। इन टिप्पणियों से साबित होता है कि कुछ नेता अपने निजी हितों के चलते संस्था और राष्ट्र को कमजोर करने में लगे हैं। बीसीआइ ने अपील की कि ईमानदार, गंभीर और जिम्मेदार नागरिक आगे आएं और आंदोलन कर रहे किसानों को समझाएं कि वे सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक अपना आंदोलन निलंबित कर दें। 

न्यायपालिका की छवि खराब मत करो, ये देश की आखिरी उम्मीद

उन्होंने कहा कि जो लोग मीडिया में आधारहीन बयान दे रहे हैं वे सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर अपनी बात क्यों नहीं रखते। अगर किसी को कमेटी के गठन पर आपत्ति है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में जाकर आदेश में बदलाव का अनुरोध करना चाहिए लेकिन ऐसे लोग समस्या का हल नहीं चाहते। इनका उद्देश्य आंदोलन का गलत फायदा उठाना और किसानों को गुमराह करना है। बीसीआइ ने कहा है कि उथल पुथल की आशंका से देश को बचाने के लिए बुद्धिजीवियों के चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है। सभी को मालूम है कि शांतिप्रिय 90 फीसद किसान सुप्रीम कोर्ट के रोक आदेश के बाद आंदोलन जारी रहने के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के निहित स्वार्थ हैं वे अराजकता फैलाना चाहते हैं। 

 

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