नई दिल्‍ली (जेएनएन)। विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने मंगलवार को राज्‍यसभा में 2014 में इराक के मोसुल से अपहृत 39 भारतीयों के मारे जाने की पुष्‍टि की। उन्‍होंने राज्‍य सभा में बताया कि इनके शवों को डीप पेनिट्रेशन रडार की मदद से बदूश के टीले में खोजा गया। टीले में कुल 30 पार्थिव शरीर दफनाए गए थे। खुदाई के दौरान कड़े मिले, सिख बंधुओं के लंबे बाल मिले। इन शवों को डीएनए जांच के लिए बगदाद भेजा गया। 38 शवों के डीएनए मैच हो गए। 

मामले पर दुख व्‍यक्‍त करते हुए कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता शशि थरूर ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं लापता भारतीयों में से एक मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर कौर ने कहा, 'पिछले चार सालों से विदेश मंत्री कह रहीं थीं कि वे जीवित हैं, समझ नहीं आता किस पर भरोसा करें। मैं उनसे बात करने का इंतजार कर रही हूं, हमें कोई जानकारी नहीं दी गयी है हमने उनका संसद में दिया गया बयान सुना है।'

बिहार के राजू यादव की नहीं हो पायी है पहचान

विदेश मंत्री ने आगे बताया कि इनमें से 27 लोग पंजाब के और 4 लोग हिमाचल के हैं। बिहार के 5 और पश्‍चिम बंगाल के दो लोगों की पहचान हो गयी है। हमने जहाज तैयार कर ली है इराक से प्‍लेन सीधा अमृतसर पहुंचेगा फिर पटना और कोलकाता जाएगा। बिहार के रहने वाले राजू यादव की पहचान नहीं हुई है। वीके सिंह स्‍वयं शवों को उनके परिवार वालों को सौंपेंगे।

मैंने किसी को अंधेरे में नहीं रखा: सुषमा
विदेश मंत्री के इस बड़े बयान के बाद तमाम संदेहास्‍पद सवाल उनपर उठने लगे जिसके बाद उन्‍होंने कहा, 'न तो मैंने 2014 में न ही 2017 में किसी को अंधेरे में रखा। 2017 में मैंने संसद को कहा था कि बगैर ठोस सबूत के गुमशुदा लोगों को मृत नहीं करार दे सकती। यह पाप है और गैरजिम्‍मेदाराना भी। मैं एेसा काम नहीं करुंगी जैसे ही मुझे पक्‍के सबूत मिलेंगे मैं तुरंत इस बात का खुलासा करुंगी।

'मिसिंग बीलीव टू बी किल्‍ड' हम नहीं कह सकते

विदेश मंत्री ने कहा, 'हरजीत मसीह एक व्‍यक्‍ति है, हम सरकार हैं वो कह सकता है हम नहीं। हरजीत की तरह सरकार कुछ भी नहीं कर सकती। मिसिंग बीलीव टू बी किल्‍ड हम नहीं कह सकते हैं हम जिम्‍मेदार सरकार हैं।' विदेश मंत्री ने बताया कि इस बात की जानकारी नहीं है कि इन्‍हें कब मारा गया हो सकता है 6 महीने पहले इनकी हत्‍या हुई हो हो सकता है दो साल पहले मार दिया गया हो।  

मोसुल के इराकी कंपनी में करते थे काम

राज्‍यसभा में विदेश मंत्री ने बताया, 'इराक के मोसुल में लापता सभी 39 भारतीय मारे गए। इन्‍हें इराक ले जाने वाले हरजीत मसीह की कहानी सच्‍ची नहीं थी। वह इराक से बच निकला था। आइएसआइएस ने सभी भारतीयों की हत्‍या कर दी।'  इस गुमशुदगी मामले के तीन साल बाद विदेश मंत्री ने दिल दहला देने वाली सच्‍चाई बताते हुए कहा, 'पहाड़ी खोदकर शव निकाले गए और डीएनए सैंपल से शवों की पहचान हुई। सबसे पहले संदीप नाम के लड़के का डीएनए मैच हुआ।' इनमें से अधिकतर पंजाब के रहने वाले कंस्‍ट्रक्‍शन वर्कर थे और मोसुल के इराकी कंपनी में काम करते थे। 2014 में इराक के सबसे बड़े शहर में इस्‍लामिक स्‍टेट ने कब्‍जा किया और इन्‍हें बंधक बना लिया था। इसके बाद ये सभी वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे। 

विमान से भारत लाया जाएगा पार्थिव शरीर

विदेश मंत्री ने कहा कि वीके सिंह इराक जाएंगे और मृतकों के पार्थिव शरीर भारत लेकर आएंगे। विमान के जरिए शवों को पंजाब, हिमाचल, पटना और पश्चिम बंगाल पहुंचाया जाएगा। उन्‍होंने कहा, सभी पार्थिव शरीर भारत लाए जाएंगे और राज्‍य सरकार को सौंपे जाएंगे। इससे पहले सरकार की ओर से इराक में लापता 39 भारतीयों का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास करने बात की गयी थी। 

बदूश के टीेले में दबे थे 39 पार्थिव शरीर
विदेश मंत्री ने कहा, '9 जुलाई 2017 को मोसुल आजाद हुआ और 10 जुलाई को वीके सिंह इराक गए। इराक में जब वीके सिंह समेत भारतीय अफसर लोगों को ढूंढ रहे थे, तो उन्होंने वहां डीप पेनीट्रेशन रडार की मांग की। उन्हें जमीन के अंदर लोगों के दबे होने की बात बता लगी। इसके बाद भारतीयों के हत्या के सबूत मिले। पहाड़ खुदवाकर शवों को निकलवाया गया। लोगों के कड़े मिले।'  विदेश मंत्री ने विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह का शुक्रिया अदा किया और कहा कि उन्होंने काफी धैर्यपूर्वक इस अभियान को पूरा किया। वे बदूस गए। मुश्किल हालात में रहे, जमीन पर सोए। फिर शवों को बगदाद लेकर आए।

सीएम कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कहा- 'हृदयविदारक'

मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने विदेश मंत्री द्वारा दी गयी इस दुखद खबर पर ट्वीट कर संवेदना जाहिर की है। उन्होंने कहा, इराक में लापता भारतीयों के बारे जाने की हृदयविदारक खबर से मैं बिखर गया हूं जिनमें से अधिकतर पंजाबी थे। उन परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं है जो 2014 में आइएआइएस द्वारा इनके अपहरण की खबर के बाद से अब तक इस उम्‍मीद में जी रहे थे।

पीड़ित परिवार को मिले आर्थिक मदद: गुलाम नबी आजाद

नई दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दुख प्रकट करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार के साथ पूरा देश है। वहीं इराक में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए कांग्रेस की ओर से सांत्‍वना देते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘इस दुखद समय में हम उनके परिवार के साथ हैं। हम उनके लिए आर्थिक मदद की मांग करते हैं कि केंद्र व राज्‍य सरकार उन्‍हें वित्‍तीय सहायता के साथ सरकारी रोजगार में अवसर प्रदान करे।‘ 

सरकार पर सवालिया निशान  

मोसुल में भारतीयों की मौत पर दुख्‍ा व्‍यक्‍त करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, 'प्रत्‍येक भारतीय नागरिक के लिए यह दुखद है बाकि मैं यह पूछना चाहूंगा कि सरकार ने इस जानकारी में इतनी देर क्‍यों लगाई, उन्‍हें बताना चाहिए था कि यह कैस हुआ उनकी मौत कब हुई। साथ ही उन्‍होंने इनके परिजनों की उम्‍मीदों को जगाए रखा जो सही नहीं था।'

इराक से मांगी थी मदद

पिछले साल जुलाई में विदेश मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि बिना ठोस सबूत के वे 39 भारतीयों को मृत नहीं घोषित कर सकतीं। बगैर सबूत के किसी को मृत करार देना पाप है। मैं यह पाप नहीं करूंगी। इसके पहले आइएस के चंगुल से मोसुल पर दोबारा नियंत्रण पाने वाले इराक से भारत ने लापता भारतीयों को खोजने में मदद मांगी थी। ये सभी मोसुल के पास प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे थे, तभी इनका अपहरण कर लिया गया था।

बता दें कि 2014 में आइएस ने इराक पर कब्जा कर लिया था। तभी से इन 39 भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।  विदेश मंत्री ने कहा था कि वे सभी इराक में सुरक्षित हैं, वहीं इन 39 लोगों को इराक ले जाने वाले शख्स हरजीत मसीह ने दावा किया था कि उन सभी को उसके सामने ही आतंकियों ने मार दिया था।

Posted By: Monika Minal

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