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'सिर्फ शक के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए नाम', पूर्व चुनाव आयुक्त ने SIR पर केंद्र को घेरा

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:07 AM (IST)

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने SIR पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि लोगों के नाम वोटर लिस्ट से सिर्फ शक के आधार पर हटाए गए, जो गैर-कानूनी है।

पूर्व चुनाव आयुक्त लवासा ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सवाल उठाए।

पूर्व चुनाव आयुक्त लवासा ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सवाल उठाए।

HighLights

  1. पूर्व चुनाव आयुक्त लवासा ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सवाल उठाए।

  2. ERO को केंद्रीकृत SIR सिस्टम तक पहुंच न देना गैर-कानूनी।

  3. प्रकाश राज ने चुनाव आयोग पर सरकार की मदद का आरोप लगाया।

डिजिटल डेस्क, कोलकता। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मंगलवार को SIR पर आयोजित एक नागरिक सम्मेलन पर शक के आधार पर लोगों का नाम लिस्ट से हटाने की बात कही। उन्होंने कहा लोगों को सिर्फ इस शक के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाया गया है कि वे नागरिक नहीं है, न कि किसी सबूत के आधार पर।

SIR में ERO को जगह नहीं 

ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लवासा ने कहा कि ERO ही वोटर को हटाने के लिए अधिकृत अधिकारी होते हैं, लेकिन उन्हें उस सिस्टम तक पहुंच नहीं दी गई जिसे केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया जा रहा था। उन्होंने इस कदम को गैर कानूनी बताया।

EC की प्राथमिकता अब उन वोटरों को हटाने की हो गई है जिन्हें वह वोट देने के लिए अयोग्य मानता है। जो एजेंसी वोटरों को शामिल करने के लिए बनी थी, वहीं उन्हें हटा रही है।

उन्होंने कहा, 'वोटरो को हटाने के लिए सिर्फ ERO ही अधिकृत अधिकारी होते हैं। लेकिन वे ECINET का इस्तेमाल नहीं कर पाए। यह गैर-कानूनी है। आमतौर पर ERO के फैसले के खिलाफ जिला चुनाव अधिकारियों या मुख्य चुनाव अधिकारी के पास अपील की जा सकती है।'

प्रकाश राज का केंद्र सरकार पर निशाना

अभिनेता और फिल्म निर्माता प्रकाश राज ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह से CEC को बचाने की कोशिश कर रही है उससे साफ है कि सरकार को उनसे फायदा हुआ है।

प्रकाश राज ने ऑनलाइन एक पोस्ट में कहा, 'मोदी और शाह की सरकार ने चुनाव आयोग (EC) का इस्तेमाल किया। आपने देखा है कि कैसे उन्होंने ज्ञानेश कुमार के आने से पहले महाराष्ट्र और बिहार में पार्टियों को तोड़ा। उन्होंने डेटा को सेंट्रलाइज़ किया है। उन्होंने माइनॉरिटी वोट्स को हटाने के लिए फॉर्म 7 का इस्तेमाल किया है। जिस तरह मोदी सरकार CEC को बचाना चाहती है, उससे पता चलता है कि EC ने उनकी कैसे मदद की। सिविल सोसाइटी के तौर पर, अब समय आ गया है कि हम सब एकजुट हों।'

'पहले कभी वोटर इतने परेशान नहीं हुए'

लवासा ने कहा कि EC के दो मुख्य काम थे एक सही से वोटर लिस्ट तैयार करना और दूसरा समय पर चुनाव कराना। उन्होंने कहा, 'EC को पता था कि बंगाल में चुनाव कब होने हैं, फिर भी SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्हें पता था कि समय कम है।'

लवासा ने कहा, 'लिस्ट में बदलाव पहले भी हुए हैं। लेकिन इतिहास में कभी भी वोटर इतने परेशान और चिंतित नहीं रहे कि उनके नाम लिस्ट में रहेंगे या हटा दिए जाएंगे।'

इस सम्मेलन में बोलने वाले अन्य लोगों में रिटायर्ड IAS अधिकारी जवाहर सरकार, कोलकाता के पूर्व मेयर और राज्यसभा के पूर्व सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य और पूर्व IAS अधिकारी अनीता अग्निहोत्री शामिल थे।

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