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सब्सिडी वाले खाद की हो रही थी हेराफेरी, E-Way बिल ने खोली गड़बड़ियों की पोल

Published: Wed, 07 Oct 2026 12:09 PM (IST)

साधारण से दिखने वाले E-Way बिल ने ट्रकों की आवाजाही पर नजर रखते हुए यूरिया की हेराफेरी का बड़ा खेल उजागर किया है।

E-Way बिल ने खोली पोल।

E-Way बिल ने खोली पोल।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नौ साल पहले ट्रकों की आवाजाही पर नजर रखने और टैक्स चोरी रोकने के लिए लाए गए साधारण से दिखने वाले E-Way बिल ने अब एक बहुत बड़े खेल का पर्दाफाश कर दिया है। इसी डिजिटल टूल की मदद से सरकार ने उस यूरिया की हेराफेरी को पकड़ लिया है, जिस पर सरकार भारी-भरकम सब्सिडी देती है।

ईरान युद्ध के बाद सामने आया पूरा खेल

इस बात को ऐसे समझिए कि नियम कहता है, 50000 रुपये से अधिक मूल्य का सामान ले जाने वाले हर ट्रक के लिए W-Way बिल होना अनिवार्य है। वित्त मंत्रालय द्वारा किए गए एक विश्लेषण से यह बात सामने आई कि जब ईरान युद्ध के बाद फर्टिलाइजर की कमी की आशंकाओं के चलते शुरुआती जांच की गई, तो चौंकाने वाला सच दिखा।

एक फेरे में लगाते थे कई चक्कर...

जांच में पता चला कि जिन ट्रकों को तयशुदा गोदामों या ठिकानों पर खाद पहुंचानी थी, वे रास्ते में या तो लंबे चक्कर काट रहे थे या फिर एक ही फेरे में कई-कई जगहों पर चक्कर लगा रहे थे। इस शुरुआती सुराग ने सरकार को चौंका दिया, जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने तुरंत फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट को इस बारे में आगाह किया।

संसद की समिति की रिपोर्ट में क्या था?

बता दें कि हाल ही में इस पूरे मामले में संसद की एक स्थायी समिति की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खाद की किस तरह भारी 'लीकेज' हो रही है। 

रिपोर्ट में बताया गया कि रैक पॉइंट से दूरदराज के जिलों खासकर जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में खाद ले जाते समय रास्ते में ही आंशिक रूप से माल उतार लेना या रूट बदल देना आम बात थी।

दस्तावेजों के बिना सफर का भी मामला

इतना ही नहीं अकेले मध्य प्रदेश में 2025-26 के दौरान बिना वैध दस्तावेजों के यूरिया के परिवहन के 28 मामले सामने आए। इसके अलावा डेस्टिनेशन पर खाद पहुंचने की सूचना देने में देरी या रिपोर्ट न करने जैसी बातें भी रिपोर्ट में दर्ज हैं।

पड़ोसी देशों में हो रही थी तस्करी

संसदीय पैनल के मुताबिक, किसानों के लिए मिलने वाले नीम-कोटेड यूरिया को किसानों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में डायवर्ट कर दिया जा रहा था। एक साथ कई राज्यों में खपाया जा रहा था। 

रिपोर्ट की माने तो इसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब जैसी जगहों पर प्लाईवुड, रेसिन फैक्ट्रियों, डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड (DEF) इकाइयों और कैटल फीड बनाने वाली फैक्ट्रियों में खपाया जा रहा था। इसके अलावा, विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्टों से यह भी खुलासा हुआ है कि ट्रकों के जरिए भारत से पड़ोसी देशों में खाद की तस्करी भी की जा रही थी।

एक्शन में सरकार, हजारों लाइसेंस रद

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस हेराफेरी पर लगाम कसने के लिए साल 2025 में देश भर में 4.8 लाख छापे मारे गए। इस दौरान 17,000 से अधिक नोटिस जारी किए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले लगभग 7000 लाइसेंस रद कर दिए गए। इसके साथ ही डिफॉल्टर्स के खिलाफ 850 से ज्यादा FIR दर्ज की गईं।