नई दिल्ली (जेएनएन)। देश में जून में शुरू होने वाले मानसून सीजन की विदाई का समय आ रहा है। इस दौरान सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मानसून 30 सितंबर को वापस चला जाएगा। इस दौरान वैसे तो देश भर में सामान्य बारिश हुई है लेकिन इसके बावजूद 251 जिले ऐसे हैं जिन पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है। खासकर देश के पूर्व, उत्तर-पूर्व और दक्षिण राज्यों में कम बारिश के कारण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून से 70 फीसदी बारिश
एक जून से मानसून सीजन शुरू होने के बाद से 117 दिनों में देश में सामान्य बारिश रिकॉर्ड की गई है। भारतीय मौसम विभाग के ताजा विश्लेषण के अनुसार इस दौरान देश में 9 फीसदी कम बारिश हुई है जिसे सामान्य माना जाता है। बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून से देश में 70 फीसदी बारिश होती है और यह मानसून 18 लाख करोड़ रुपये की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम माना जाता है। 

कर्नाटक के 30 में 23 जिले सूखाग्रस्त
चार महीने की मानसूनी बारिश के बावजूद कर्नाटक के 30 में से 23 जिले सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं। आंध्र प्रदेश में छह जिलों के 274 ब्लॉकों में भी औसम से कम बारिश हुई है और उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश हुई है। दरअसल, पश्चिमी राजस्थान में एक दशक के बाद सूखे के हालात बने हैं। इसी तरह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है।
सूखा (फाइल फोटो) 

इस सदी में पांच बार सूखे की मार
देश भर में मानसूनी बारिश में 9 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अगर इसमें एक फीसदी का इजाफा होता है यानी बारिश में 10 फीसदी से ज्यादा होती है तो यह साल इस सदी का छठा सूखाग्रस्त वर्ष होगा। इससे पहले इस सदी में 2002, 2004, 2009 और 2015 में 10 फीसदी से कम बारिश हुई थी और उन वर्षों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। 

ग्यारह राज्य व केंद्र शासित प्रदेश प्रभावित
इस साल 11 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बारिश की कमी से पैदा होने वाली परिस्थितियां झेल रहे हैं। इनमें झारखंड, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं जिनके 50 फीसदी से ज्यादा जिलों में औसत से कम बारिश हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 26 सितंबर, 2018 तक देश में 793 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि दीर्घावधि औसत 870 मिलीमीटर का है। इस तरह इस साल 9 फीसदी कम बारिश हुई है। आठ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 20 से 59 फीसदी कम बारिश हुई है।
बाढ़ (फाइल फोटो)

सूखे के साथ बाढ़ का भी सामना
देश के तीन राज्य ऐसे हैं जहां इस मानसून सीजन में सूखे के साथ बाढ़ की भी विभीषिका झेलनी पड़ी। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ जिलों में सूखे के हालात हैं जो कई जिले बाढ़ से भी प्रभावित रहे। इसी तरह पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के लगभग 50 फीसदी जिलों में कम बारिश हुई लेकिन कुल मिलाकर इन राज्यों में मानसून सामान्य रहा। राज्यों में केरल की हालत सबसे जुदा रही जहां सामान्य से 24 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। 

भारी बारिश के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार
आइआइटी कानपुर के एक शोध के अनुसार देश में कुछ दिनों के अंदर भारी बारिश के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है। वायु प्रदूषण खासकर हवा में मौजूद सुक्ष्म कणों के कारण बादलों के बनने की प्रक्रिया तेज हो रही है, जिससे बारिश का वितरण प्रभावित हो रहा है। वायु प्रदूषण के अलावा बढ़ते शहरीकरण एवं वनों की कटाई के कारण भी अतिवृष्टि हो रही है।

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Posted By: Vikas Jangra