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'भगवान भी हैरान रह जाएंगे', दीवाली पर पटाखे जलाने की मिलेगी छूट या नहीं? SC में तीखी बहस

Published: Mon, 12 Oct 2026 07:18 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पाबंदी पर सुनवाई करते हुए धार्मिक भावनाओं और जन स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया।

दीवाली पर पटाखे जलाने की मिलेगी छूट या नहीं। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

दीवाली पर पटाखे जलाने की मिलेगी छूट या नहीं। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. SC ने पटाखों पर धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य में संतुलन चाहा।

  2. कम प्रदूषण वाले तरीके अपनाने, जागरूकता बढ़ाने पर जोर।

  3. एमिकस क्यूरी ने पटाखों से स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता जताई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पाबंदी लगाने पर विचार करते हुए धार्मिक भावनाओं और पब्लिक हेल्थ की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि ज्यादा जागरूकता और कम प्रदूषण फैलाने वाले तरीकों को अपनी मर्जी से अपनाना ही आगे का रास्ता हो सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि वे धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को त्योहार ऐसे तरीकों से मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनसे हवा और शोर का प्रदूण कम से कम हो।

हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे- सुप्रीम कोर्ट

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चीफ जस्टिस ने कहा, 'हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन साथ ही लोगों को खुद आगे आकर इसे अपनाना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में संतुलन बनाने वाला नजरिया अपनाया जाना चाहिए।'

बेंच NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही थी, जिसमें पटाखे, पराली जलाना और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसे मुद्दे शामिल थे। सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने पटाखे जलाने के धार्मिक आधार पर सवाल उठाते हुए पूछा, 'पटाखे जलाने में क्या धार्मिक है?'

भगवान भी हैरान रह जाएंगे- एमिकस क्यूरी

सीनियर वकील अपराजिता सिंह, जो एमिकस क्यूरी के तौर पर बैंच की मदद कर रही हैं, ने वायु प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए खतरों का जिक्र किया। पटाखों को धार्मिक रीति-रिवाजों से जोड़ने वाली दलीलों का जवाब देते हुए सिंह ने रहा कि अगर भगवान को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे परेशान हो रहे हैं और बीमार पड़ रहे हैं, तो वे भी हैरान रह जाएंगे।

उन्होंने पटाखे जलाने के समय पर पाबंदी लागू करने में आने वाली मुश्किलों की ओर भी इशारा किया और तर्क दिया कि असरदार तरीके से लागू किए बिना, घंटों की सीमा तय करने का कोई खास फायदा नहीं होगा। सिंह ने कहा कि कोर्ट में यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है कि सिर्फ दो घंटे या एक घंटे की बात है, लेकिन कोर्ट यह भी जानता है कि इसे लागू नहीं किया जाता है। पुलिस अफसरों का हर सड़क पर मौजूद रहना मुमकिन नहीं है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)