नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बावजूद पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को पंजाब रिमोट सें¨सग सेंटर के सेटेलाइट ने सूबे के 22 जिलों में 1289 खेतों में पराली जलाने की तस्वीरें कैद कीं। सबसे अधिक पराली मुक्तसर में जलाई गई, जहां 380 के करीब तस्वीरें कैद हुई हैं। इसी तरह फाजिल्का में 357 एक्टिव फायर इवेंट तस्वीरों में देखे गए। फिरोजपुर में 215, अमृतसर में 20, बरनाला में 16, ब¨ठडा में 79, फरीदकोट में 95, गुरदासपुर में 10, मोगा में 30, मानसा में 27, लुधियाना में आठ, तरनतारन में 35, संगरूर में आठ, जालंधर व फतेहगढ़ साहिब में एक-एक खेत में पराली जलाने के मामले सेटेलाइट तस्वीरों में देखे गए।

जबकि हरियाणा में मंगलवार को 79 स्थानों पर खेतों में आग लगाने के मामले सामने आए। इसमें सबसे अधिक फतेहाबाद जिले में सेटेलाइट ने 37 मामले पकड़े। इसके बाद सिरसा में 23 स्थानों पर आग के मामले मिले। हालांकि लोगों को स्मॉग से राहत है। इसका करण उत्तर पश्चिमी हवाओं से जुड़ा हुआ है। इन हवाओं की गति धीमी है, जिससे स्मॉग वातावरण में रुक नहीं रहा है।

उप्र में कड़ी कार्रवाई, कई गिरफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा डीएम व एसएसपी से जवाब-तलब करने के बाद पराली जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। 94 किसानों को नोटिस जारी किया गया है। बरेली में मंगलवार को 25 किसानों पर एफआइआर दर्ज की गई। उधर, शाहजहांपुर जिले में पराली जलाने को लेकर नौ किसानों की गिरफ्तारी की गई। 31 किसानों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है।

पीलीभीत में 15 किसानों की गिरफ्तारी की गई। सम्भल में भी खेत में पराली जलाने के आरोप में एक किसान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया। मथुरा में पराली जलाने की घटनाएं न रोक पाने पर पांच प्रधानों को कारण बताओ नोटिस दिए गए। दूसरी ओर एटा में 60 फीसद से अधिक किसान अब भी धान की पराली जला रहे हैं।

दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी सिर्फ 10 फीसद

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए हर बार पंजाब और हरियाणा को जिम्मेदार ठहराने की कोशिशों को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। इससे दिल्ली सरकार के दावे की पोल भी खुल गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के प्रदूषण में पंजाब व हरियाणा के किसानों की ओर से जलाई गई पराली के धुएं का योगदान 10 फीसद से भी कम है।

प्रदूषण के लिए अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं अहम है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के मेंबर सेक्रेटरी करुणेश गर्ग ने हाल के दिनों में सीपीसीबी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब के किसानों को बदनाम किया जाता रहा है। उन्होंने दिल्ली सरकार को सलाह दी है कि प्रदूषण के लिए दूसरे राज्यों को जिम्मेदार ठहराने की बजाय दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाले कारणों के प्रति ठोस कदम उठाए जाएं।

Posted By: Nitin Arora

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