नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। चालू पेराई सीजन (अक्तूबर-सितंबर) में पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना अधिक एथनाल उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पेराई सीजन की शुरुआत एक अक्तूबर से हो चुकी है। वैश्विक बाजार में चीनी की निर्यात मांग के बावजूद घरेलू एथनाल उत्पादन में कोई कमी आने का अनुमान नहीं है। चालू सीजन में कुल 35 लाख टन चीनी को एथनाल में तब्दील किया जाएगा जबकि बीते सीजन में कुल 20 लाख टन चीनी की जगह एथनाल का उत्पादन किया गया, जिससे कुल 300 करोड़ लीटर एथनाल का उत्पादन किया गया।

नहीं रुकेगा गन्ना भुगतान

यह चालू सीजन में बढ़कर 5000 करोड़ लीटर से अधिक पहुंच सकता है। इससे जहां मिलों में चीनी का भारी स्टाक नहीं जमा होगा, वहीं किसानों का गन्ना भुगतान नहीं रुकेगा। वैश्विक बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। इसी के चलते घरेलू बाजार में भी पेट्रोल के दाम बहुत बढ़े हैं। इसी के चलते बीते वर्ष (दिसंबर से नवंबर) के दौरान पेट्रोल में कुल नौ फीसद एथनाल का मिश्रण किया गया।

चल रही तैयारियां

एथनाल मिश्रण को वर्ष 2022 तक 10 फीसद करने का लक्ष्य है जबकि वर्ष 2025 तक इसे बढ़ाकर 20 फीसद तक ले जाना है। इसके लिए चौतरफा तैयारियां चल रही हैं। एथनाल उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। एथनाल इकाइयां स्थापित करने के लिए जहां रियायती दर पर ऋण मुहैया कराया जा रहा है, वहीं एथनाल की सरकारी खरीद निर्धारित मूल्य पर सुनिश्चित की गई है। इसके लिए अब तक 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है।

एथनाल उत्पादन में 40 प्रतिशत तक बढ़ेगी खाद्यान्न की हिस्सेदारी

एथनाल के कुल उत्पादन में फिलहाल गन्ने की शतप्रतिशत हिस्सेदारी है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आने वाले दिनों में इसमें खाद्यान्न की हिस्सेदारी 40 फीसद तक बढे़गी। इसके लिए खाद्यान्न से एथनाल उत्पादन की अनुमति दे गई है। एक अनुमान के मुताबिक खाद्यान्न से एथनाल उत्पादन करने के तकरीबन 1.65 करोड़ टन अनाज की जरूरत पड़ेगी। इससे सरप्लस खाद्यान्न की समस्या को सुलझाने में मदद मिलेगी। धान व मक्का के किसानों के लिए एथनाल उत्पादन वरदान साबित हो सकता है।

पेट्रो पदार्थों की आयात निर्भरता में आएगी कमी

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक चीनी के सरप्लस उत्पादन को रोकने में एथनाल उत्पादन अहम साबित होगा। चालू पेराई सीजन में 35 लाख टन चीनी की जगह एथनाल का उत्पादन किया जाएगा। जबकि वर्ष 2025 तक इसे बढ़ाकर 50 से 60 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य है। चीनी को एथनाल में तब्दील करने की योजना से देश में सरप्लस चीनी उत्पादन की समस्या खत्म हो सकती है।

पेट्रो पदार्थों की आयात निर्भरता में आएगी कमी

यही नहीं जिन राज्यों में मक्का की खेती होती है, वहां इस तरह की इकाइयों की स्थापना होनी शुरू हो गई है। एथनाल मिश्रण की योजना के सफल होने से पेट्रो पदार्थों की आयात निर्भरता में कमी आएगी। एक अनुमान के मुताबिक सालाना 30 हजार करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। 

Edited By: Krishna Bihari Singh