नई दिल्ली, पीटीआइ। किसी परियोजना के लिए पेड़ों को काटने पर भरपाई के लिए उसके आसपास ही अच्छी गुणवत्ता की जमीन पर पौधारोपण किया जाना चाहिए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की फारेस्ट एडवाइजरी कमेटी (एफएसी) ने राज्यों से इस दिशा में कदम उठाने को कहा है। वन संरक्षण कानून के तहत जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, पेड़ों की कटाई होने पर उसकी भरपाई के लिए संबंधित एजेंसी के खर्च पर उतनी ही जमीन पर पौधारोपण किया जाना चाहिए।

  • परियोजनाओं के लिए पेड़ों के कटने पर भरपाई सुनिश्चित करें
  • पौधारोपण के लिए परियोजना के आसपास ही जमीन दी जाए
  • जमीन की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता

दोगुनी जमीन पर करना होगा पौधारोपण

यदि परियोजना केंद्र सरकार की या किसी पीएसयू की है, तो पौधारोपण के लिए कम गुणवत्ता की जमीन को भी चुना जा सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति में दोगुनी जमीन पर पौधारोपण करना होगा। एफएसी ने पिछले दिनों पाया था कि ऐसे मामलों में आमतौर पर जमीन का चयन करते समय मंत्रालय के निर्देशों की अनदेखी की जाती है।

राज्यों को निभानी चाहिए जिम्मेदारी

निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि पौधारोपण के लिए जमीन परियोजना के आसपास ही होनी चाहिए। उस क्षेत्र में जमीन न मिले तो नजदीकी जिले में जमीन ली जा सकती है। कमेटी ने कहा कि इस मामले में राज्यों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। अधिकारियों को परियोजना के बदले पौधारोपण के लिए मिल रही जमीन की गुणवत्ता और दूरी पर नजर रखनी चाहिए।

निर्देशों की न हो अनदेखी

कमेटी ने कहा कि परियोजना के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली वन की जमीन दी जाती है, लेकिन उसके बदले संबंधित कंपनियां या एजेंसियां पौधारोपण के लिए कम गुणवत्ता वाली जमीन दे देती हैं। साथ ही अक्सर वह जमीन कहीं दूर होती है।

पेड़ों के कटने से हुए नुकसान की भरपाई

ऐसे में वन विभाग के लिए उसका प्रबंधन मुश्किल होता है और पेड़ों के कटने से हुए नुकसान की भरपाई में देरी होती है। जमीन ऐसी जगह पर और ऐसी गुणवत्ता वाली होनी चाहिए, जिससे नुकसान की अधिकतम भरपाई हो सके। दूरी कम होने से वन विभाग आसानी से प्रबंधन कर पाता है और भविष्य में उस जमीन पर अतिक्रमण की आशंका भी कम होती है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh