माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि कर्मचारी से साझा नहीं की गई वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) की विपरीत प्रविष्टि प्रोन्नति से इन्कार का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले को दोहराते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह न बताई गई एसीआर की विपरीत प्रविष्टि को नजर अंदाज करते हुए कानून के मुताबिक कर्मचारी की प्रोन्नति पर नये सिरे से निर्णय ले।

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ रुखसाना शहीन खान की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी से एसीआर की प्रविष्टियां साझा करने के पूर्व फैसले को फिर दोहराया

पीठ ने वर्ष 2013 के सुखदेव बनाम भारत सरकार मामले में दी गई व्यवस्था को दोहराते हुए कहा कि उस मामले में कानून तय किया जा चुका है और अब इस बात में कोई विवाद नहीं रह गया है कि कर्मचारी को नहीं बताई गई एसीआर में की गई विपरीत प्रविष्टि प्रोन्नति से इन्कार का आधार नहीं हो सकती।

पीठ ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि वह रुखसाना शहीन खान को नहीं बताई एसीआर की विपरीत प्रविष्टि को नजर अंदाज करते हुए मामले पर कानून के मुताबिक नये सिरे से विचार करे। उस प्रक्रिया में कर्मचारी को भी सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा और उसे हर तरह की दलील रखने की छूट होगी। कोर्ट ने सरकार को दो महीने में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।

सुप्रीमकोर्ट ने सुखदेव सिंह मामले में व्यवस्था दी थी कि कर्मचारी की एसीआर में दर्ज हर प्रविष्टि अच्छी, बुरी, ठीकठाक या बहुत अच्छी जो भी हो एक निश्चित समय के भीतर कर्मचारी को अवश्य बताई जानी चाहिए। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने वह फैसला एसीआर में दर्ज प्रविष्टियों के बारे में दो न्यायाधीशों की पीठों के विरोधाभासी फैसलों से उत्पन्न भ्रम को दूर करते हुए दिया था। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि कर्मचारी एसीआर में दर्ज प्रविष्टि की जानकारी होने पर उसे सुधारने के लिए प्रयास कर सकता है असंतुष्ट होने पर उसके खिलाफ ज्ञापन दे सकता है।

कोर्ट ने कहा था कि एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि एक निश्चित समय के भीतर अनिवार्य रूप से कर्मचारी को बताना कानूनन उचित है। इससे तिहरे उददेश्य की पूर्ति होगी। पहला एसीआर में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि की जानकारी कर्मचारी को दिये जाने से वह अपनी एसीआर प्रविष्टि सुधारने के लिए ज्यादा परिश्रम से काम करेगा और बेहतर नतीजे देगा। दूसरा हो सकता है कि वह एसीआर में दर्ज प्रविष्टि से संतुष्ट न हो। ऐसे में वह दर्ज प्रविष्टि में सुधार के लिए अथारिटी को ज्ञापन दे सकता है और तीसरा पहलू यह है कि इससे एसीआर में प्रविष्टि दर्ज करने के बारे में पारदर्शिता आएगी और व्यवस्था में नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत बेहतर ढंग से लागू होगा। 

Posted By: Bhupendra Singh