नई दिल्ली, पीटीआइ। लाखों रुपये की घूस लेकर मनमाफिक आदेश के जरिये निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोप में सीबीआइ ने गैस अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के निदेशक (विपणन) ई एस रंगनाथन को अपने घेरे में ले लिया है। जांच एजेंसी ने मामला दर्ज पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी सीबीआइ ने शनिवार को दी। शुक्रवार को मामला दर्ज होने के बाद सीबीआइ ने दिल्ली-एनसीआर में करीब आठ जगह छापेमारी में जिसमें रंगनाथन का दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस स्थित कार्यालय और नोएडा के सेक्टर 62 स्थित उनका आवास भी शामिल है।

सीबीआइ रंगनाथन के ठिकानों से अब तक 1.3 करोड़ रुपये नकद बरामद कर चुकी है। सीबीआइ के प्रवक्ता आरसी जोशी ने बताया कि रंगनाथन के अलावा जांच एजेंसी ने बिचौलियों पवन गौर और राजेश कुमार, कथित तौर पर घूस की रकम लेने वाले एन.रामकृष्णन नायर, व्यवसायी सौरभ गुप्ता और उनकी पंचकुला स्थित कंपनी यूनाइटेड पालिमर इंडस्ट्रीज और आदित्य बंसल और करनाल स्थित उनकी कंपनी बंसल एजेंसी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

प्रवक्ता ने बताया कि सीबीआइ ने जाल बिछाकर दिल्ली स्थित एक निजी कंपनी के निदेशक (कुमार) और एक दलाल को कथित रूप से घूस की रकम का लेनदेन करते गिरफ्तार किया। कथित रूप से रंगनाथन के लिए ली जा रही यह रकम 10 लाख रुपये की नगदी के रूप में थी। प्रवक्ता ने बताया कि अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है लेकिन रंगनाथन को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार विभिन्न परिसरों में तलाशी अभी भी जारी है। गिरफ्तार लोगों में गौर, कुमार, नायर, गुप्ता और बंसल शामिल हैं। इन आरोपितों के दिल्ली, नोएडा, गुरग्राम, पंचकुला, करनाल में स्थित परिसरों में तलाशी ली गई, जिसमें अब तक 84 लाख रुपये बरामदे किए गए हैं। इनमें से अकेले 75 लाख रुपये दलाल के गुरुग्राम के स्थित घर से मिले हैं। सीबीआइ द्वारा दर्ज एफआइआर के अनुसार गौर और कुमार, रंगनाथन के दलाल के रूप में काम करते थे और निजी कंपनियों से कथित रूप से घूस की रकम वसूला करते थे।

इन तीनों की आपस में खूब छनती थी और ये भ्रष्ट गतिविधियों में संलग्न थे। सूत्रों ने सीबीआइ को बताया कि कुमार के निर्देश पर, गौर ने रंगनाथन से पेट्रो रसायन उत्पादों के खरीदारों को कुछ छूट देने की अनुमति देने के लिए कहा था। इसके बदले घूस की पेशकश की गई। प्राथमिकी के अनुसार कुमार और गौर ने इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पिछले साल 11 दिसंबर को रंगनाथन से उनके नोएडा स्थित आवास पर मुलाकात भी की थी। दो दिन बाद गौर ने कुमार को सूचित किया कि गेल में छूट के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

गेल में छूट आदेश जारी करने पर अंतिम निर्णय होने के बाद कुमार ने छूट के अन्य संभावित लाभार्थियों से घूस की व्यवस्था करने के लिए संपर्क किया। गौर, कुमार और रंगनाथन ने 14 दिसंबर को दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में फिर से इस पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की।सूत्रों ने आगे बताया कि 17 दिसंबर को राजेश ने लाभार्थी निजी पक्षों से घूस की रकम वसूल कर रंगनाथन को देने के लिए गौर को सौंप दी।

सूत्र ने आगे बताया कि रंगनाथन के निर्देश पर नायर ने 18 दिसंबर को गौर के आवास से 40 लाख रुपये की रकम वसूल ली। इसके बाद गौर ने छूट आदेश जारी करने के लिए 20 दिसंबर को रंगनाथन से संपर्क। इस पर रंगनाथन ने उससे कहा कि वह मुंबई से लौटने के बाद आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। एफआइआर में आरोप लगाया गया कि कुमार ने इस मामले कथित तौर पर दो और संभावित लाभार्थियों गुप्ता और बंसल को साथ लिया और उन्हें मनमाफिक आदेश के बदले घूस देने के लिए राजी किया।

कुमार ने 13 जनवरी को गुप्ता से कहा कि वह गेल से छूट आदेश जारी करवा देगा लेकिन इसके बदले उसे रंगनाथन को कथित तौर पर 12 लाख रुपये की घूस देनी होगी।गौर ने गुप्ता से जल्द से जल्द पैसे भेजने के लिए भी कहा। इसके बाद उसने कथित तौर पर कुमार को तीन लाख रुपये का भुगतान किया, जबकि शेष रकम हवाला के जरिये भेजी जानी थी।

बताया जाता है पवन गौर और राजेश कुमार के अनुरोध पर रंगनाथन ने नवंबर, 2021 में गेल के कुछ अधिकृत स्टाकिस्टों के परिसर में जांच पड़ताल की थी। हालांकि उस औचक निरीक्षण से पहले, ईएस रंगनाथन ने अपने कुछ चहेते स्टाकिस्टों को सतर्क कर दिया था। प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में सीबीआइ ने आरोपितों के खिलाफ आइपीसी की आपराधिक साजिश की धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रविधानों के तहत मामला दर्ज किया है।