चुनाव आयोग में बढ़ी खींचतान: दो आयुक्तों ने 14 बार उठाए सवाल, मचा सियासी बवाल
चुनाव आयोग में अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है, जहां दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर 14 ...और पढ़ें

दो आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई।
HighLights
दो आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई।
मतदाता सूची पुनरीक्षण और फॉर्म-6 पर उठे गंभीर सवाल।
चुनाव आयोग ने सभी महत्वपूर्ण फैसलों को सर्वसम्मति से बताया।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर आयोग में अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर तीन सदस्यीय आयोग में से दो सदस्यों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 से ज्यादा बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
जुलाई 2026 में विवाद ज्यादा बढ़ा तो दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था। आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कुछ एक तरफा फैसले लिए। एक प्रकाशित रिपोर्ट में यह राजफाश होने के बाद सियासी राजनीतिक तूफान भी खड़ा हो गया है। सत्ता व विपक्ष एक-दूसरे पर हमलावर हैं।
दरअसल बुधवार को प्रकाशित एक खबर में जहां दस महीने के अंदर दोनों आयुक्तों की ओर से विभिन्न मसलों पर 14 आपत्तियों की बात कही गई थी, वहीं मुख्य रूप से आपत्ति फार्म-6 को लेकर थी। इसमें नए वोटर के लिए भी अपने पिता और दादा की मतदाता सूची की जानकारी मांगी गई थी।
आयुक्तों की आपत्ति थी कि ऐसा बदलाव तभी किया जा सकता है जब कानून मंत्रालय की ओर से गजट में ऐसा संशोधन किया जाए। संधू ने फार्म-6 में बगैर सरकार की मंजूरी के बदलाव पर आपत्ति जताई थी। हालांकि आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह आरोप ही गलत है क्योंकि फार्म-6 में संशोधन किया ही नहीं गया। हां, उसके साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया।
दूसरा बड़ा सवाल नए एकीकृत वन स्टाप डिजिटल प्लेटफार्म यानी ईसीआइनेट, जिसमें ईआरओ नेट शामिल है, को केंद्रीकृत करके उससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले ईआरओ (मतदाता पंजीकरण अधिकारी) और एईआरओ (सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी ) जैसे अधिकारियों को दूर कर दिया गया या फिर उनके अधिकारों को सीमित कर दिया गया। जबकि आयोग की सफाई है कि ईसीआइनेट अनधिकृत छेड़छाड़ रोकने के लिए साइबर सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत काम करता है। इसलिए राष्ट्रीय डाटाबेस में मानक साइबर सुरक्षा उपाय किए गए हैं।
अधिकृत अधिकारियों को शक्ति प्रदान है। गोवा में जो व्यवधान आया था, वह तकनीकी खामियों के कारण था। जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त संधू व जोशी ने काम-काज के बंटवारे से जुड़े विवाद पर कैबिनेट सचिव से अपने अधिकारी मनीष गर्ग की शिकायत भी की।
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SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से
अंदरूनी मतभिन्नता ही नहीं, अनभिज्ञता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से एकतरफा कुछ फैसले लिए जाने की खबरों के बाद चुनाव आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी और अंदरूनी मतभेदों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ विषयों पर विचारों में मतभिन्नता होना गलत नहीं है लेकिन हाल के महीनों में देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) समेत 40 नई पहल शुरू हुईं और सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। यह और बात है कि देर रात तक दोनों चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी की ओर से कोई व्यक्तिगत सफाई नहीं आई।
आयोग ने कहा कि वह एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों तथा स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। उसने कहा कि आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता है।
आयोग के सभी कार्य कानूनों और आयोग के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं। आयोग ने कहा कि केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
आयोग के सूत्रों का कहना है कि कई मुद्दों पर चर्चा के दौरान मतभिन्नता हो सकती है। लेकिन अधिकतर मुद्दों पर अंतिम निर्णय में सर्वसम्मति थी। यह और बात है कि आयोग की ओर से इसके साक्ष्य के तौर पर कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
सूत्रों ने कहा कि एसआइआर की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मई 2026 के निर्णय में एसआइआर की प्रक्रिया को जांचा था और सही पाया था। वहीं एसआइआर पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी नौ बार हो चुका है।
