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चुनाव आयोग ने TMC का नाम और सिंबल किया फ्रीज, ममता और ऋतब्रत गुट को बड़ा झटका

Published: Thu, 17 Sep 2026 10:44 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 10:46 PM (IST)

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह के उपयोग पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ...और पढ़ें

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किया

चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद में चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। उपचुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए पार्टी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

आयोग के इस फैसले को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों ही गुटों के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश

पार्टी पर वर्चस्व और असली तृणमूल कांग्रेस होने के दावों को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्षों ने आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना-अपना अधिकार जताया था।

विवाद की गंभीरता और आगामी उपचुनावों की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों द्वारा मौजूदा नाम और प्रतीक के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक (फ्रीज) लगा दी है।

चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी गुट और अरुप रॉय के नेतृत्व वाला गुट, दोनों में से कोई भी सीधे टीएमसी नाम का प्रयोग नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, पार्टी के अधिकृत सिंबल दो फूल और घास के उपयोग पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

दोनों गुटों को देने होंगे विकल्प

आयोग के निर्देशों के मुताबिक, दोनों गुटों को 18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे तक अपनी-अपनी पसंद के तीन नाम और फ्री सिंबल सूची में से तीन चुनाव चिह्नों के विकल्प (वरीयता के आधार पर) सौंपने होंगे। यदि वे चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी के नाम का संदर्भ जोड़ सकते हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों, डॉ. विवेक जोशी व डॉ. सुखबीर सिंह संधू द्वारा हस्ताक्षरित यह व्यवस्था सिंबल्स ऑर्डर 1968 के पैरा 15 के तहत अस्थायी तौर पर लागू रहेगी, जब तक कि इस विवाद पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।

पहले भी फ्रीज हो चुके हैं चर्चित चुनाव निशान

पार्टी में विभाजन के बाद चुनाव चिह्न फ्रीज करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच खींचतान के बाद पार्टी का सिंबल बंगला जब्त कर लिया गया था।

ठीक इसी तरह 2022 में शिवसेना में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच छिड़े विवाद के दौरान भी आयोग ने धनुष-बाण निशान को फ्रीज कर दिया था।

बंगाल की दो सीटों पर 6 अक्टूबर को वोटिंग

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। इन दोनों ही सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के दोनों धड़ों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं और असली पार्टी होने का दावा ठोका है।

आयोग के इस नए कदम के बाद अब दोनों ही गुटों को नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा।

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