अब थोक में नहीं दिए जा सकेंगे फॉर्म-7, चुनाव आयोग ने तय की सीमा
चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब एक व्यक्ति विशेष गहन ...और पढ़ें

फॉर्म-7 के थोक आवेदन पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए उपयोग होने वाले फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाई है। इसे लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े दावे और आपत्तियों के दौरान एक व्यक्ति अब इससे जुड़े सिर्फ दस आवेदन ही दे सकेगा। वहीं मतदाता सूची के सामान्य पुनरीक्षण के दौरान महीने भर में एक व्यक्ति सिर्फ पांच फार्म-7 दे सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में इसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं थी।
चुनाव आयोग ने कर्नाटक सहित कई राज्यों में एक व्यक्ति की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटवाने व उसको लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए दिए जा रहे फॉर्म-7 को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद ये निर्देश दिए हैं। यह स्पष्ट किया है कि किसी के नाम को हटवाने के लिए फॉर्म -7 देने मात्र से नाम नहीं हटता है, बल्कि उसकी ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की जांच के बाद ईआरओ इसका फैसला लेता है।
आयोग के मुताबिक फॉर्म-7 को लेकर नियम पहले से निर्धारित हैं। ऐसे आवेदन मिलने पर ईआरओ सबसे पहले आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा और उसके बयान को दर्ज करेगा। अगर किसी व्यक्ति ने एक से अधिक फॉर्म-7 भरे हैं तो प्रत्येक फार्म के लिए उसका बयान अलग-अलग दर्ज होगा।
इसके बाद ईआरओ जांचेगा कि आपत्ति जायज है या नहीं। इस प्रक्रिया में जिस व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति की गई है, उसे भी अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। इसके बाद ईआरओ अंतिम निर्णय लेता है।
