छात्रों की आत्महत्या पर शिक्षा मंत्रालय सख्त, उच्च शिक्षण संस्थानों को किया सचेत
आईआईटी दिल्ली और बॉम्बे में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के बाद शिक्षा मंत्रालय ने केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश दिए हैं।

आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या पर शिक्षा मंत्रालय सख्त

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अगस्त में आईआईटी दिल्ली और अब आईआईटी बॉम्बे में एक छात्र की आत्महत्या की घटना के बाद शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आईआईटी सहित देश भर के केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसी घटनाओं को सख्ती से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए है।
साथ ही 15 जनवरी, 2026 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आत्महत्या की घटनाओं के रोकथाम के लिए दिए दिशा-निर्देश का प्रभावी तरीके से अमल करने को कहा है। जिसमें छात्रों की अप्राकृतिक मौत पर तुरंत पुलिस को सूचना देने व परिसरों में चौबीसों घंटे चिकित्सा सहायता मुहैया कराने जैसे उपाय शामिल है।
उच्च शिक्षण संस्थानों को दिए गए कड़े दिशा-निर्देश
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी किए गए पत्र में ऐसी घटनाओं को लेकर चिंता जताई गई है। साथ ही दिशा-निर्देश के तहत केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों से छात्रों की आत्महत्या या अप्राकृतिक मौतों को लेकर सालाना एक रिपोर्ट भी देने को कहा है।
इसके साथ ही मंत्रालय ने अपने पत्र में छात्रवृत्ति के समय से वितरण और यूजीसी रेगुलेशन के तहत शिकायत सेल आदि के गठन के निर्देश दिए हैं। संस्थानों से शिक्षकों के खाली होने वाले पदों को चार महीने के भीतर भरने व प्रशासनिक पदों को जैसे कुलपति या निदेशक के पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने संस्थानों के प्रमुखों को लिखा पत्र
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव सैयद एकराम रिजवी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को लिखे गए इस पत्र में कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट और मंत्रालय की ओर से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए समय-समय पर दिए दिशा-निर्देशों पर नियमित अमल करें।
ज्ञात हो कि आइआइटी दिल्ली में एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार ने 22 अगस्त को और 18 सितंबर को आइआइटी बांबे के छात्र साहिल वाकोडे ने आत्महत्या की थी।
