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टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ पर ED का एक्शन, यूपी-बंगाल समेत 5 राज्यों में 13 जगहों पर छापामारी

Published: Thu, 16 Jul 2026 12:05 PM (IST)Updated: Thu, 16 Jul 2026 12:10 PM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय ने टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पांच राज्यों के 13 ठिकानों ...और पढ़ें

HighLights

  1. ईडी ने टेरर फंडिंग मामले में 5 राज्यों में छापेमारी की।

  2. अवैध घुसपैठ और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कार्रवाई की गई।

  3. रोहिंग्या, बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ कराने वाले गिरोह पर शिकंजा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में 13 जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के सिलसिले में की गई।

ये छापे आज सुबह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत संदिग्धों के ठिकानों पर मारे गए। ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर जिन जगहों पर तलाशी ली, उनमें नई दिल्ली में बाटला हाउस और मदनपुर खादर, उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, महाराष्ट्र में रायगढ़ और पश्चिम बंगाल में साउथ 24 परगना, नॉर्थ 24 परगना, कोलकाता और मुर्शिदाबाद शामिल हैं।

ईडी की तलाशी जारी

ईडी की टीम मदनपुर खादर में सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, नॉर्थ 24 परगना में कबीरबाग मिल्लत एकेडमी और हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम जैसे संस्थानों के साथ-साथ कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के यहां भी तलाशी ले रही है।

क्या है मामला?

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर से जुड़ा है। यह एफआईआर एक ऐसे संगठित गिरोह के बारे में है जिस पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए जाली भारतीय पहचान-पत्रों का इंतजाम करने और देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके बसने में मदद करने का आरोप है।

फाइनेंशियल नेटवर्क का भंडाफोड़

इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में एक गहरे पैठ वाले फाइनेंशियल नेटवर्क का पता चला है। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल हैं, जिन पर आरोप है कि उन्हें भारी मात्रा में विदेशी चंदा मिला और उन्होंने गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई बैंक अकाउंट, म्यूल अकाउंट और कई चरणों वाले ट्रांजैक्शन के जरिए उस पैसे को इधर-उधर किया।

ईडी की जांच से यह भी पता चला है कि संदिग्ध लाभार्थियों को नकद निकासी और कम मूल्य के ट्रांसफर किए गए हैं।

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