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    गुजरात से म्यांमार via मिजोरम... ED ने किया नार्को-हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़, ऐसे होती थी ड्रग्स की सप्लाई

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 05:15 PM (IST)

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत-म्यांमार सीमा पर ड्रग कॉरिडोर और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। मिजोरम, असम और गुजरात में छापेमारी की गई, जिसमें कई अहम खुलासे हुए। जांच में पता चला कि गुजरात से कच्चा माल मिजोरम होते हुए म्यांमार भेजा जाता था, जहाँ ड्रग्स बनाकर भारत में सप्लाई की जाती थी। हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन होता था, जिसका केंद्र असम का करीमगंज था।

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    ईडी ने नार्को-हवाला नेटवर्क का किया भंडाफोड़।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-म्यांमार सीमा पर पूर्वोत्तर के ड्रग कॉरिडोर और उससे जुड़े हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पहली बार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई में इस नेटवर्क की परतें खुलकर सामने आई हैं।

    मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गुरुवार को मिजोरम के चंफाई और आइजोल के साथ-साथ असम के करीमगंज जिले के श्रीभूमि और गुजरात के अहमदाबाद में एक साथ छापेमारी की गई। यह ऑपरेशन मिजोरम पुलिस की उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें लगभग पांच किलो हेरोइन जब्त की थी। इसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई थी। मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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    गिरफ्तारी के बाद खुलासा

    गिरफ्तार हुए 6 आरोपियों के वित्तीय विश्लेषण से मिजोरम स्थित फर्मों और गुजरात की कंपनियों के बीच गहरे वित्तीय रिश्ते सामने आए। ईडी के मुताबिक, प्रीकर्स रसायन भारत से मिजोरम के रास्ते 1643 किमी. लंबी, भारत-म्यांमार सीमा पार करके म्यांमार पहुंचाए जाते हैं, जहां अवैध लैब्स में मेथाम्फेटामाइन तैयार होता है।

    इस चेन को चलाने के लिए असम, मिजोरम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली में फैले हवाला ऑपरेटरों के खाते में 52 करोड़ रुपये से ज्यादा संदिग्ध क्रेडिट और नकद जमा पाए गए। पहली बार सीमा पर सीधे की गई इस छापेमारी में 35 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज बरामद किए गए।

    गुजरात बना ड्रग्स सिंडिकेट का केंद्र बिंदु

    इस खुलासे में एक बात सामने निकलकर आई है कि गुजरात पूरे ड्रग सिंडिकेट का स्टार्टिंग प्वाइंट था। यहां से मेथाम्फेटामाइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल मिजोरम भेजा जाता था। दस्तावेजों में यह एक वैध व्यापार दिखाया जाता था, लेकिन इनका असली खरीदार मिजोरम की वो फर्में थीं जिनके नाम पहले भी ड्रग्स तस्करी के मामलों में सामने आए हैं।

    कैसे होती थी माल की सप्लाई?

    ईडी को पता चला है कि इस कच्चे माल का पेपरवर्क कोलकाता स्थित शेल कंपनियों के सहारे साफ किया जाता था। मिजोरम का चंफाई इस पूरे ड्रग सिंडिकेट का सबसे अहम केंद्र था, क्योंकि गुजरात से आए प्रीकर्सर रसायन चंफाई पहुंचाए जाते थे और फिर यहां से छोटे पार्सलों, वाहनों और कैरियर्स के सहारे म्यांमार के चिन राज्य तक तस्करी होते थे।

    फिर वहां मौजूद लैब्स में अवैध रसायनों से सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जाती थी। तैयार की गई ड्रग्स फिर उसी चंफाई रूट से होते हुए भारत में प्रवेश करती थी और पूरे देश में सप्लाई की जाती थी।

    हवाला से इकट्ठा होता था पैसा

    असम के करीमगंज का श्रीभूमि इलाका सिंडिकेट का सबसे महत्वपूर्ण कैश कलेक्शन और हवाला का केंद्र था। नकद रकम जमा करने, नकली इनवॉयस बनाने और मल्टी-लेयर बैंकिंग के जरिए ड्रग्स की बिक्री से निकला पैसा वैध लेनदेन जैसा दिखाया जाता था। यह साफ हो चुका है कि म्यांमार में बनने वाली ड्रग्स की कमाई भारत में असम के हवाला चैनलों के जरिए घूमती थी और फिर तस्करों को लौटाई जाती थी।

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