इकोनॉमिक सर्वे: रिकॉर्ड स्तर पर कॉरपोरेट मुनाफा, कंपनियों की कमाई बढ़ी; टैक्स में बढ़ा आम आदमी का योगदान
इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार, जहां कॉरपोरेट इंडिया ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, वहीं सरकारी खजाने में आम लोगों का टैक्स ...और पढ़ें
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इकोनॉमिक सर्वे: रिकॉर्ड पर कॉरपोरेट मुनाफा कंपनियों की कमाई बढ़ी (फाइल फोटो)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुरुवार को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2026 से देश की अर्थव्यवस्था की एक अहम तस्वीर सामने आई है। सर्वे बताता है कि जहां कॉरपोरेट इंडिया ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया, वहीं सरकारी खजाने में टैक्स के रूप में आम लोगों और गैर-कॉरपोरेट संस्थाओं का योगदान ज्यादा बढ़ा है। यानी मुनाफा कंपनियों का बढ़ा, लेकिन टैक्स का बोझ ज्यादा आम करदाता ने उठाया।
प्रत्यक्ष करों की हिस्सेदारी बढ़ी
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, देश के कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष करों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। कोरोना से पहले यह हिस्सेदारी करीब 52% थी, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 59% हो गई।
कोविड से पहले व्यक्तिगत और गैर-कॉरपोरेट टैक्स जीडीपी का औसतन 2.4% था। कोविड के बाद यह बढ़कर 3.3% हुआ और FY25 में 3.7% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान टैक्स कलेक्शन की रफ्तार नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से भी तेज रही। अर्थशास्त्र में इसे टैक्स बॉयेंसी कहा जाता है।
कॉरपोरेट बनाम व्यक्तिगत टैक्स
व्यक्तिगत आयकर की हिस्सेदारी अब कुल टैक्स आय में करीब 32% हो गई है, जबकि कॉरपोरेट टैक्स की हिस्सेदारी सिर्फ 25% के आसपास बनी हुई है। वित्त वर्ष 2022 में व्यक्तिगत आयकर की हिस्सेदारी 24.7% थी, जो अब 31.8% तक पहुंच गई है। वहीं कॉरपोरेट टैक्स की हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।
टैक्सपेयर्स की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
- FY22 में 6.9 करोड़ लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न भरा
- FY25 में यह संख्या बढ़कर 9.2 करोड़ हो गई
इसके पीछे तीन बड़े कारण बताए गए हैं:-
- पहला कारण- आय में बढ़ोतरी, जिससे ज्यादा लोग टैक्स दायरे में आए
- दूसरा करण- तकनीक का इस्तेमाल, जिससे टैक्स चोरी कम हुई
- तीसरा कारण- सरकार के छोटे-छोटे नज इंटरवेंशन, जैसे समय पर रिमाइंडर और प्रोत्साहन
विदेशी संपत्तियों पर सख्ती
आयकर विभाग के फॉरेन एसेट कैंपेन के तहत डेटा मिलान किया गया। जिन करदाताओं की विदेशी संपत्ति रिटर्न से मेल नहीं खा रही थी, उन्हें नोटिस भेजे गए। इस अभियान में25000 लोगों ने रिटर्न संशोधित किए, 29000 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्ति घोषित हुई और 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी आय सामने आई
कॉरपोरेट मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, कॉरपोरेट मुनाफा FY21 के 2.5 लाख करोड़ से बढ़कर FY25 में 7.1 लाख करोड़ रुपए हो गया। यह करीब 184% की भारी बढ़ोतरी है। मुनाफा बढ़ने के साथ कॉरपोरेट टैक्स संग्रह भी 100% से ज्यादा बढ़ा, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही।
डेटा मिलान के जरिए गलत टैक्स छूट के दावों को भी पकड़ा गया। इसमें राजनीतिक चंदा और HRA से जुड़े गलत दावों पर नोटिस भेजे गए और 9,000 लोगों ने अपडेटेड रिटर्न फाइल किए। इससे 2050 करोड़ रुपए की गलत कटौती रोकी गई, 680 करोड़ रुपए का अतिरिक्त टैक्स सरकार को मिला और सिर्फ HRA मामलों में 119 करोड़ रुपए से ज्यादा का अतिरिक्त कलेक्शन हुआ
GST कलेक्शन भी मजबूत
अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कुलGST संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपए रहा। सालाना आधार पर इसमें करीब 6.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
