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एक ही गैस-धूल के बादल से बने पृथ्वी और मंगल, फिर भी क्यों अलग है दोनों का विकास? नई रिसर्च में बड़ा खुलासा

Published: Sat, 03 Oct 2026 11:51 PM (IST)

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी और मंगल, एक ही स्रोत से बनने के बावजूद, शुरुआती दौर में अलग-अलग पदार्थों को समेटकर विकसित हुए।

क्यों अलग है पृथ्वी और मंगल का विकास? (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

क्यों अलग है पृथ्वी और मंगल का विकास? (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पृथ्वी और मंगल करीब 4.5 अरब वर्ष पहले एक ही विशाल गैस और धूल के घूमते हुए बादल से बने, लेकिन दोनों ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया एक जैसी नहीं थी। कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के ग्लोब इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के नए अध्ययन से पता चला है कि दोनों ग्रहों ने शुरुआती दौर में अलग-अलग प्रकार के पदार्थों को अपने भीतर समेटा।

यह अध्ययन नेचर एस्ट्रोनामी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा दो युवा ग्रहों या प्रोटोप्लैनेट से आए पदार्थों से बना। ये प्रोटोप्लैनेट छोटे ठोस कणों और कंकड़ जैसे पदार्थों को अपने गुरुत्वाकर्षण से जमा कर बड़े हुए। इस प्रक्रिया को ‘पेबल एक्रीशन’ कहा जाता है।

पृथ्वी के शेष करीब 25 प्रतिशत हिस्से के निर्माण में प्लैनेटेसिमल्स की भूमिका रही। इसके विपरीत, मंगल के कुल द्रव्यमान का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा प्लैनेटेसिमल्स से आया, जबकि करीब 25 प्रतिशत हिस्सा छोटे कणों के जमा होने की प्रक्रिया से बना।

इससे संकेत मिलता है कि एक ही सौरमंडलीय सामग्री से बनने के बावजूद दोनों ग्रहों का शुरुआती विकास अलग रहा। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी और मंगल की क्रस्ट तथा मेंटल में मौजूद सोडियम, जिंक और पोटैशियम जैसे वाष्पशील तत्वों का अध्ययन किया।

ये तत्व ग्रहों के निर्माण के दौरान हुई प्रक्रियाओं के रासायनिक संकेत सुरक्षित रख सकते हैं। कंप्यूटर माडल के जरिए विभिन्न संभावित परिस्थितियों का परीक्षण कर वैज्ञानिकों ने दोनों ग्रहों के निर्माण की प्रक्रियाओं का अनुमान लगाया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अरबों वर्ष पुरानी घटनाओं के प्रत्यक्ष प्रमाण लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन ग्रहों के मेंटल की रासायनिक संरचना आज भी उनके शुरुआती निर्माण की जानकारी सुरक्षित रखती है। यह अध्ययन सौरमंडल के शुरुआती इतिहास और चट्टानी ग्रहों के विकास को समझने में नई जानकारी देता है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)